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1984 सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में बरी 6 आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस, जानें क्या है पूरा मामला

Anti Sikh Riots: 1984 सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को नोटिस जारी किया है। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच अब 21 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगी।

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सुप्रीम कोर्ट ने छह आरोपियों को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली एसएलपी में आरोपियों को नोटिस जारी किया

Photo : ANI

Anti Sikh Riots: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सिख विरोधी दंगों के मामलों में 6 बरी किए गए आरोपियों को नोटिस जारी किए है जिसके खिलाफ केंद्र और दिल्ली सरकार ने एसएलपीएस (अपील) दायर की है। न्यायमूर्ति अभय एस. ओके की अगुवाई वाली पीठ ने आरोपियों को इस साल 21 जुलाई तक एसएलपी पर अपने जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि जब दिल्ली सरकार ने सूचित किया कि अदालत के पहले के निर्देशों के अनुपालन में अब एसएलपी दायर की गई है। हम इस तथ्य से अवगत हैं कि उच्च न्यायालय (दिल्ली) के समक्ष बरी किए गए लोगों के खिलाफ अपील दायर करने में काफी देरी हुई है। हालांकि, हम रिट याचिकाओं और समय-समय पर पारित आदेशों में शिकायतों से अवगत हैं। नोटिस जारी करें। ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड की सॉफ्ट कॉपी मंगवाएं।

2016 में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट कर रही थी सुनवाई

शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता एस गुरलाद सिंह कहलों को आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ एकत्र किए गए साक्ष्यों का संकलन प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हम याचिकाकर्ता को साक्ष्यों के नोट्स का संकलन रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश देते हैं। नोटिस 21 जुलाई को वापस करने योग्य है। अदालत एस गुरलाद सिंह कहलों द्वारा 2016 में दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिल्ली में 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान हुई 51 हत्या के मामलों की जांच की मांग की गई थी। कहलों की याचिका ने शीर्ष अदालत को 1984 के सिख विरोधी दंगों में फिर से खोले गए 186 मामलों की फिर से जांच के लिए न्यायमूर्ति एसएन ढींगरा के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) बनाने के लिए प्रेरित किया था, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी। शीर्ष अदालत ने इस साल मार्च में केंद्र और दिल्ली सरकारों को सिख विरोधी दंगों के मामलों में विभिन्न बरी किए गए लोगों के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका दायर करने का निर्देश दिया था, जिन्हें पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था।

Shashank Shekhar Mishra
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शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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