Punjab Congress Dispute: पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। पंजाब के एआईसीसी (AICC) प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) ने राज्य के सियासी हालात पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को सौंप दी है। इस रिपोर्ट के आने के बाद यह लगभग साफ हो गया है कि पंजाब कांग्रेस में फिलहाल किसी भी तरह का नेतृत्व परिवर्तन नहीं होने जा रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भूपेश बघेल की इस रिपोर्ट में मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को उनके पद पर बनाए रखने की पुरजोर सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजाब के 29 में से 25 जिला अध्यक्ष और सूबे के 7 में से 4 मौजूदा कांग्रेस सांसद राजा वड़िंग के नेतृत्व का समर्थन कर रहे हैं। दिल्ली में केसी वेणुगोपाल से मुलाकात के बाद जब मीडिया ने बघेल से पंजाब के हालातों पर सवाल किया, तो उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा, "यह कोई बच्चों का खेल नहीं है।" बघेल का यह बयान साफ इशारा करता है कि आलाकमान राजा वड़िंग को हटाने के मूड में नहीं है।
भूपेश बघेल की चंडीगढ़ में लगातार छह दिनों तक चली मैराथन बैठक
दरअसल, पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ समय से सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और कुछ अन्य वरिष्ठ नेता लगातार राजा वड़िंग को अध्यक्ष पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। इस विवाद को सुलझाने के लिए भूपेश बघेल ने चंडीगढ़ में लगातार छह दिनों तक मैराथन बैठकें की थीं और आखिरी दिन चन्नी के नेतृत्व वाले असंतुष्ट गुट से भी मुलाकात की थी।
राहुल गांधी ने खरगे के साथ की थी चर्चा
भूपेश बघेल की रिपोर्ट सौंपने से पहले दिल्ली में बैठकों का दौर भी काफी तेज रहा। इससे एक दिन पहले राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और केसी वेणुगोपाल के साथ लंबी चर्चा की थी। वहीं, वेणुगोपाल ने पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा से भी अलग से मुलाकात की थी। पंजाब में आगामी चुनावों को देखते हुए जहां आम आदमी पार्टी भाजपा और अकाली दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं, वहीं कांग्रेस के लिए इस अंदरूनी कलह को शांत कर चुनावी मैदान में उतरना एक बड़ी चुनौती है।
