Ban on SIMI: सुप्रीम कोर्ट ने स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) पर प्रतिबंध बरकरार रखने वाले UAPA ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिकाकर्ता की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज किया है। 2024 में UAPA ट्रिब्यूनल ने SIMI पर प्रतिबंध को सही ठहराया था। ट्रिब्यूनल ने कहा था कि SIMI युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ रहा है और फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन के जरिए सक्रिय है। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा था कि SIMI के लश्कर-ए-तैयबा, अल-कायदा जैसे आतंकी संगठनों से संबंध हैं।
याचिका पर विचार करने से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक न्यायिक न्यायाधिकरण के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) पर लगाए गए प्रतिबंध को पांच साल के लिए बढ़ाए जाने की पुष्टि की गई थी। जस्टिस विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने न्यायाधिकरण के 24 जुलाई, 2024 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।
केंद्र सरकार ने 29 जनवरी, 2024 को सिमी पर प्रतिबंध को पांच साल के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया था जिसके बाद न्यायाधिकरण का गठन गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत किया गया था। सिमी को पहली बार 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान गैरकानूनी घोषित किया गया था और तब से प्रतिबंध को समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है।
सिमी की स्थापना 25 अप्रैल, 1977 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में युवाओं और छात्रों के एक प्रमुख संगठन के रूप में हुई थी, जो जमात-ए-इस्लामी-हिंद में आस्था रखते थे। हालांकि, संगठन ने 1993 में एक प्रस्ताव के माध्यम से खुद को स्वतंत्र घोषित कर दिया।
