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West Bengal Congress President: शुभंकर सरकार बने बंगाल कांग्रेस के नए अध्यक्ष, अधीर रंजन चौधरी की हुई छुट्टी

Subhankar Sarkar: शुभंकर सरकार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) सचिव के वर्तमान पद से मुक्त कर दिया गया है। पार्टी की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने शुभंकर सरकार को तत्काल प्रभाव से पश्चिम बंगाल कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है।

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शुभंकर सरकार बने बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष।

Photo : Twitter

Subhankar Sarkar: कांग्रेस ने शनिवार को अधीर रंजन चौधरी के स्थान पर शुभंकर सरकार को पश्चिम बंगाल इकाई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया। शुभंकर सरकार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) सचिव के वर्तमान पद से मुक्त कर दिया गया है। इस बाबत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने एक आधिकारिक अधिसूचना में कहा, कांग्रेस अध्यक्ष ने शुभंकर सरकार को तत्काल प्रभाव से पश्चिम बंगाल कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है। पार्टी निवर्तमान पीसीसी अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी के योगदान की सराहना करती है।

पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा प्रदेश इकाई का अध्यक्ष बनाये जाने की घोषणा के बाद शुभंकर सरकार ने कहा, राज्य कांग्रेस बंगाल में पार्टी कार्यकर्ताओं की इच्छा के अनुसार काम करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में कांग्रेस के भविष्य का रास्ता चुनने में लोगों की इच्छाएं सबसे महत्वपूर्ण कारक होंगी। बता दें, शुभंकर सरकार अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सचिव थे और अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और मिजोरम राज्यों का कार्यभार संभाल रहे थे।

अधीर रंजन चौधरी ने दिया था इस्तीफा

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। अधीर रंजन चौधरी लगातार पांच कार्यकाल के बाद अपने गृह क्षेत्र बहरामपुर से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार यूसुफ पठान से 2024 का लोकसभा चुनाव हार गए थे। उन्होंने राज्य में कांग्रेस पार्टी की हार की जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दिया था।

खड़गे पर साधा था निशाना

बंगाल कांग्रेस पद से अधीर रंजन की छु्टी के पीछे बड़ा कारण कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को माना जा रहा है। बीते दिनों न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान अधीर रंजन ने खड़गे पर निशाना भी साधा था। उन्होंने कहा था कि जिस दिन से मल्लिकार्जुन खड़गे पार्टी के अध्यक्ष बने हैं उस दिन से देश में पार्टी के बाकी पद अस्थायी हो गए हैं। यहां तक कि मेरा पद भी अस्थायी हो। उन्होंने कहा, खड़गे ने टेलीवीजन पर कहा था कि यदि जरूरी हुआ तो मुझे बाहर रखा जाएगा, उनके इस तरह के बयान से मुझे दुख हुआ था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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