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'INDI'कुनबे में शुरू हुआ बिखराव कहां तक जाएगा, ममता के बाद अब किसकी बारी?

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Jan 24, 2024, 01:39 PM IST

Blow to INDI Alliance : बंगाल के बाद सीट बंटवारे का सबसे बड़ा पेंच यूपी, बिहार, केरल और महाराष्ट्र में है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान सीट बंटवारे पर कांग्रेस और सपा में बात नहीं बनी तो अखिलेश यादव ने कई सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए।

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बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी टीएमसी।

Blow to INDI Alliance : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को साफ कर दिया कि वह 2024 का लोकसभा चुनाव अकेले लड़ेंगी। लोकसभा की 42 सीटों वाले राज्य में वह 'INDI'गठबंधन का हिस्सा नहीं होंगी। जाहिर है कि उनके इस फैसले से विपक्षी एकता और 'इंडी गठबंधन' को एक बड़ा झटका लगा है। हालांकि, ममता ने कहा कि है कि वह अभी भी 'INDI'गठबंधन का हिस्सा हैं। लेकिन बंगाल के बाहर टीएमसी का कोई खास प्रभाव नहीं है। ऐसे में उनके गठबंधन में रहने या न रहने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।

गठबंधन में सीट बंटवारे पर फंसा है पेंच

सवाल यह है कि गठबंधन में शामिल कोई अन्य दल भी क्या ममता का रास्ता चुनेगा? क्योंकि गंठबंधन में खींचतान एवं गतिरोध का सबसे बड़ा मसला सीट बंटवारा ही है। सीट बंटवारे पर बंगाल में बात बिगड़ी है। बंगाल के बाद सीट बंटवारे का सबसे बड़ा पेंच यूपी, बिहार, केरल और महाराष्ट्र में है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान सीट बंटवारे पर कांग्रेस और सपा में बात नहीं बनी तो अखिलेश यादव ने कई सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए।

यूपी में भी बढ़ सकता है टकराव

इस समले पर दोनों पार्टियों में खटास बढ़ी और बयानबाजी हुई। जैसे-तैसे सपा और कांग्रेस में सुलह हुई। सूत्रों का कहना है कि लोकसभा चुनाव के लिए यूपी में सीट बंटवारे पर फैसला नहीं होने के बीछे दोनों दलों की असहमति है। यहां भी सपा कांग्रेस को ज्यादा सीटें देने के पक्ष में नहीं है। यहां भी गठबंधन की एकता पर खतरा बना हुआ है।

नीतीश कुमार पर अटकलें जारी

बिहार में गठबंधन के तीन बड़े खिलाड़ी हैं। पहली राजद, दूसरी जद-यू और तीसरी कांग्रेस। यहां भी कौन कितने सीट पर चुनाव लड़ेगा, इस बारे में कोई फैसला नहीं हो पाया है। रिपोर्टों के मुताबिक यहां भी कांग्रेस अपने लिए ज्यादा सीटें चाहतीा है। सीट बंटवारे पर बातचीत जारी है लेकिन अभी सहमति नहीं बन पाई है। दूसरा नीतीश कुमार के बारे में कहा जा रहा है कि चुनाव से पहले वह एनडीए का दामन थाम सकते हैं।

नीतीश कर सकते हैं पुराने घर' में वापसी

बताया जा रहा है कि यहां जद-यू के नेता एवं कार्यकर्ता एनडीए में वापसी का ख्वाब देख रहे हैं। कुछ दिनों पहले अमित शाह से नीतीश की वापसी पर सवाल पूछा गया था तो उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई प्रस्ताव यदि आता है तो उस पर विचार किया जा सकता है। शाह के इस बयान ने अटकलों का हवा दिया। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी मानते हैं कि नीतीश की अपने 'पुराने घर' में वापसी हो सकती है। बिहार में भी विपक्षी एकता कौन सा करवट लेगी इसके बारे में अभी निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।

केरल, महाराष्ट्र में भी पेंच

केरल में सत्ता में वाम दल और विपक्ष में कांग्रेस है। यहां सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं लेकिन यहां भी मसला सीट बंटवारे और उस पर सहमति का है। लेफ्ट चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस को कितनी सीटें देगा, इस पर उसने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। सीटों को लेकर यहां भी टकराव बढ़ सकता है। महाराष्ट्र में कांग्रेस ज्यादा सीटों पर लड़ना चाहती है तो उद्धव ठाकरे भी अपने लिए ज्यादा सीटें चाहते हैं। राकांपा अध्यक्ष शरद पवार की अपनी महात्वाकांक्षा है। हालांकि, इस राज्य में कांग्रेस, उद्धव गुट की शिवसेना और पवार के राकांपा की तुलना में मजबूत स्थिति में है। ये दोनों दल बगावत एवं टूट का शिकार हो चुके हैं लेकिन कांग्रेस यहां खुद को एकजुट रखने में सफल रही है। सीट बंटवारे में यह बात उसके पक्ष में जा सकती है।

आलोक कुमार राव
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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