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'अपरिपक्व राहुल' के 'लंदन बोल' पर शिवराज ने सुनाया पुराना किस्सा, बोले- US में मनमोहन को लेकर मुझसे...

  • Written by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 16, 2023, 05:20 PM IST

राहुल गांधी पर तंज कसते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा, उनकी मानसिक उम्र पांच साल से भी कम है। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से जुड़ा एक किस्सा भी सुनाया।

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शिवराज सिंह चौहान

Photo : ANI

राहुल गांधी के लंदन में दिए गए बयान पर संसद से लेकर सड़क तक संग्राम मचा हुआ है। भाजपा लगातार कांग्रेस सांसद से माफी मांगने की मांग कर रही है। इस बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए एक पुराना किस्सा सुनाया है। उन्होंने कहा मैं भी कई बाद विदेश गया, लेकिन कभी भी अपने देश या अपने प्रधानमंत्री की आलोचना नहीं की।

शिवराज सिंह चौहान ने पुराने किस्से को याद करते हुए कहा, जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब मैं अमेरिका गया था। उस समय मुझसे वहां के लोगों ने पूछा था कि क्या मनमोहन सिंह एक 'कमतर' प्रधानमंत्री हैं? मैंने कहा नहीं, वह हमारे प्रधानमंत्री हैं और मुझे उन पर गर्व है। वह हमारा गौरव हैं।

राहुल गांधी को बताया अरपिपक्व

शिवराज सिंह चौहान ने इस दौरान राहुल गांधी को एक अपरिपक्व राजनेता करार दिया। उन्होंने कहा, राहुल गांधी की मानसिक आयु 5 साल से भी कम लगती है, लेकिन जिस प्रकार से उन्होंने विदेश जाकर आलोचना की है यह देश की प्रतिष्ठा को मिट्टी में मिलाने का काम किया है। मुझे तो उनके भारतीय होने में ही संदेह है।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी बोला हमला

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी राहुल गांधी के लंदन में दिए गए बयान पर उनकी आलोचना की, उन्होंने राहुल पर हमला बोलते हुए कहा, उन्होंने कहा, राहुल गांधी को संसद में माफी मांगनी चाहिए, पूरा देश उनसे माफी की मांग कर रहा है। सारे सांसद उनसे माफी की मांग कर रहे हैं। विदेशी धरती पर इस तरह की बात बोलने के लिए उन्हें माफी मांगनी ही चाहिए।

लंदन में क्या बोले थे राहुल?

राहुल गांधी ने लंदन में कहा था कि भारत में लोकतंत्र खतरे में है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कहा था कि वह भारत के विचार को नष्ट कर रहे हैं। वह देश पर एक नया विचार थोपने की कोशिश कर रहे हैं। पीएम मोदी देश के कुछ लोगों को देश का नहीं मानते, वह उन्हें सेकेंड क्लास सिटीजन मानते हैं। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा था कि हमें संसद में बोलने की आजादी नहीं है, हमारे माइक बंद कर दिए जाते हैं।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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