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शिवपाल यादव का विवादित बयान; करणी सेना को बताया आतंकवादी मानसिकता वाला संगठन

Shivpal Yadav's Controversial Statement: अखिलेश यादव के चाचा और समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव ने विवादित बयानबाजी करते हुए करणी सेना पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा है कि 'आतंकवादी मानसिकता वाला संगठन है करणी सेना।' शिवपाल ने आखिर ऐसा क्यों कहा, आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं।

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शिवपाल यादव ने करणी सेना के बारे में क्या कुछ कहा?

UP Politics: उत्तर प्रदेश के गोंडा में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने सपा सांसद रामजी लाल सुमन को धमकी मामले में करणी सेना की आलोचना करते हुए कहा कि अगर कोई संगठन खुलेआम राज्यसभा सदस्य को जान से मारने की धमकी देता है, तो वह आतंकवादी मानसिकता वाला संगठन कहा जाएगा। ऐसे संगठनों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन अफसोस कि भाजपा सरकार ऐसे तत्वों को संरक्षण दे रही है।

जातीय जनगणना पर क्या बोले शिवपाल यादव?

अन्य मुद्दों पर बात करते हुए शिवपाल यादव ने कहा कि जातीय जनगणना सपा की पुरानी मांग है, जिससे दलित, पिछड़े और शोषित वर्गों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने दबाव में यह फैसला लिया, लेकिन वह जनता को धोखा देती है और संविधान में दिए गए अधिकारों को लागू नहीं करती।

आतंकवाद के मुद्दे पर शिवपाल ने भाजपा को घेरा

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पिछले दिनों हुए आतंकवादी हमले पर सपा नेता ने कहा कि सपा हमेशा आतंकवाद के खिलाफ रही है और देश का साथ देती है, लेकिन भाजपा ने इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने सवाल उठाया कि आतंकवादी देश में कैसे घुस आए, जबकि सरकार सुरक्षा के बड़े दावे करती है।

शिवपाल ने भाजपा पर जनता को लूटने का लगाया आरोप

मदरसों पर कार्रवाई और बहराइच के कई सौ साल पुराने दरगाह मेले पर रोक को शिवपाल ने जनविरोधी बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के हित में कोई काम नहीं करती, केवल सत्ता में बने रहने के लिए देश को बर्बाद कर रही है। महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सपा हमेशा आवाज उठाती है, लेकिन भाजपा इनसे ध्यान हटाने के लिए गलत मुद्दे उठाती है। जीएसटी और टैक्स वसूली को लेकर भी उन्होंने भाजपा पर जनता को लूटने का आरोप लगाया।

पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बयान पर तंज कसते हुए शिवपाल यादव ने कहा कि जब भाजपा के लोग ही यह कह रहे हैं, तो प्रमाण की जरूरत नहीं। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) को भारत में वापस लाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सपा इसका समर्थन करती है, लेकिन भाजपा ने अपने वादे पूरे नहीं किए। आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए शिवपाल ने कहा कि जनता को अब ऐसी सरकार को हटा देना चाहिए, क्योंकि भाजपा के शासन में देश हर क्षेत्र में पीछे चला गया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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