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शिमला में तबाही: समरहिल में शिव मंदिर ढहा, 25 से 30 श्रद्धालु मलबे में दबे; अब तक 20 की मौत

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 14, 2023, 01:08 PM IST

Shimla landslide: समरहिल इलाके में भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ, जिस कारण यहां स्थित शिव मंदिर ढह गया। इस घटना में करीब 50 श्रद्धालु दब गए। मुख्यमंत्री सुखविंद सिंह सुक्खू ने कहा कि हादसे में 20 लोगों की मौत हो गई।

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शिमला में शिवमंदिर ढहा

Photo : ANI

Shimla landslide: हिमाचल प्रदेश एक बार फिर बारिश, बाढ़ और भूस्खलन का प्रकोप झेल रहा है। पूरे राज्य में तबाही का मंजर जारी है। इस बीच शिमला में बड़ा हादसा हो गया। सोमवार को यहां के समरहिल इलाके में भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ, जिस कारण यहां स्थित शिव मंदिर ढह गया। इस घटना में करीब 50 श्रद्धालु दब गए। मुख्यमंत्री सुखविंद सिंह सुक्खू ने कहा कि हादसे में 20 लोगों की मौत हो गई।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा, हादसे की सूचना मिलते ही यहां सेना और एनडीआरएफ को बचाव कार्य में लगाया गया है। उन्होंने बताया, सावन का आखिरी सोमवार होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिव मंदिर पहुंचे थे। इस दौरान भूस्खलन के कारण मंदिर ढह गया। उन्होंने बताया, मलबे में अभी भी 25 से 30 लोगों के दबे होने की आशंका है। हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक लोगों बचाया जा सके।

सोलन में बादल फटने से 7 की मौत

इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के सोलन में भी देर रात बड़ा हादसा हुआ। यहां रात करीब डेढ़ बजे बादल फटने के कारण दो मकान व एक गौशाल बह गई। इस हादसे में करीब सात लोगों की मौत हो गई। वहीं, शिमला में एक अन्य जगह फागली इलाके में भूस्खलन हुआ है। यहां मलबे से नौ शवों को बाहर निकाला गया है। राज्य के आपात अभियान केंद्र के अनुसार, आपदा के कारण राज्य में 752 सड़कें बंद कर दी गयी हैं। भारी बारिश के मद्देनजर सभी स्कूल और कॉलेज को सोमवार को बंद रखने का आदेश दिया गया है।

ध्वजारोहण के अलावा अन्य कार्यक्रम रद्द

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा है कि बीते महीने राज्य में आई बाढ़ के कारण राज्य की संपत्ति को बहुत नुकसान हुआ था। हालांकि, इस बार ज्यादा लोगों की जानें जा रही हैं। उन्होंने बताया, कल स्वतंत्रता दिवस है। इस कार्यक्रम को रद्द नहीं किया जा सकता, हालांकि हमारी प्राथमिकता ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाने की है। इसलिए सिर्फ ध्वजारोहण का कार्यक्रम किया जाएगा। इसके बाद सभी अधिकारी राहत कार्य में लग जाएंगे। वहीं राजभवन में भी ध्वजारोहण होगा। इसके अलवा 'ऐट होम' का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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