शरद पवार की राजनीति को अक्सर सामने वाले अंदाजा नहीं लगा पाते हैं, ऐसा कहा जाता है। शरद पवार के भतीजे अजित पवार कुछ महीने पहले बागी होकर अलग हो गए और भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना ली, शुरू में शरद पवार खुब भड़के, लेकिन अब शांत हैं। इसी तरह की बगावत अजित पवार ने 2019 में भी की थी। तब रातों रात उन्होंने पाला बदला था और फडणवीस के साथ मिलकर डिप्टी सीएम बन गए थे, तब भी शरद पवार भड़के थे, भतीजे को वापस लाए थे और कांग्रेस-शिवसेना के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई थी। अब उसी बगावत को लेकर ऐसा खुलासा हुआ है, जिसे जानकर हर कोई हैरान रह जाएगा।
किसने किया दावा
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री गिरीश महाजन ने दावा किया है कि शरद पवार 2019 में भाजपा के साथ सरकार बनाना चाहते थे, इसके लिए दिल्ली में मीटिंग कर रहे थे, तभी अजित पवार भाजपा के साथ आए थे, ये शरद पवार की गुगली थी।
क्या है पूरा दावा
गिरीश महाजन ने दावा किया कि पिछले विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री के तौर पर देवेन्द्र फडणवीस के नेतृत्व में अजित पवार द्वारा सुबह-सुबह उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेना शरद पवार की 'गुगली' थी। महाजन ने कहा कि शरद पवार पीठ में छुरा घोंपने के लिए जाने जाते हैं। फडणवीस के विश्वासपात्र महाजन ने नासिक में संवाददाताओं से कहा- "2019 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद, शरद पवार ने सरकार बनाने के लिए दिल्ली में भाजपा नेताओं के साथ चार बैठकें कीं। उस समय शिवसेना (अविभाजित) अनुचित व्यवहार कर रही थी। पवार ने हमारे नेताओं से यहां तक कहा था कि वे चिंता न करें।"
दिल्ली में चार मीटिंग
महाजन ने कहा कि शरद पवार ने हमेशा से ही फडणवीस और अजित पवार की 80 घंटे तक चली सरकार के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया-ठकुल मिलाकर, शरद पवार ही थे जो फैसले ले रहे थे। भाजपा नेताओं के साथ (दिल्ली में) चार बैठकों में से एक में उनके साथ अजित पवार भी गए थे...शरद पवार इस बात से कभी इनकार नहीं कर सकते।"
