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VIDEO: 'तुम बच गए, मैंने प्रचार किया होता तो तुम्हारा क्या होता...' भतीजे रोहित ने पैर छुए तो बोले चाचा अजित पवार

Rohit Pawar touched Ajit Pawar feet Video:रोहित पवार, राकांपा (एसपी) प्रमुख के साथ राज्य के पहले मुख्यमंत्री वाई. बी. चव्हाण की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने के लिए उनके स्मारक पर गए थे। बाद में अजित पवार भी दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने चव्हाण की समाधि पर गए। इस दौरान दोनों का आमना-सामना हुआ।

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रोहित पवार और अजित पवार का हुआ आमना-सामना।

Photo : Twitter

Rohit Pawar touched Ajit Pawar feet Video: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद डिप्टी सीएम अजित पवार और उनके भतीजे व शरद पवार गुट के नेता रोहित पवार का आमना-सामना हुआ। रोहित पवार ने अपने चाचा अजित पवार के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लिया। इस दौरान दोनों के बीच मजाकिया अंदाज में बातें भी हुईं, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मुलाकात के दौरान अजित पवार ने अपने भतीजे से कहा, अगर उन्होंने रोहित पवार के विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार किया होता तो उनके लिए सीट जीतना मुश्किल हो जाता।

बता दें, हाल में संपन्न महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में राकांपा (एसपी) प्रमुख शरद पवार के पोते रोहित पवार ने भाजपा के राम शिंदे को 1,243 मतों के मामूली अंतर से हराकर अहिल्यानगर जिले में कर्जत जामखेड सीट बरकरार रखी। अपने भतीजे को बधाई देने के बाद अजित पवार ने चुटकी लेते हुए कहा, 'आओ, मेरा आशीर्वाद लो। तुम मुश्किल से बच गए। अगर मैंने उनकी विधानसभा सीट कर्जत जामखेड में)रैली की होती, तो सोचो क्या होता। इसके बाद रोहित पवार ने उनके पैर छुए।

पूर्व सीएम चव्हाण के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में हुआ आमना-सामना

बता दें, सोमवार को रोहित पवार, राकांपा (एसपी) प्रमुख के साथ राज्य के पहले मुख्यमंत्री वाई. बी. चव्हाण की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने के लिए उनके स्मारक पर गए थे। बाद में उपमुख्यमंत्री और राकांपा नेता अजित पवार भी दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने चव्हाण की समाधि पर गए। वहां रोहित पवार का अजित पवार से आमना-सामना हुआ।

'पितातुल्य हैं अजित पवार'

इस मुलाकात के बाद रोहित पवार ने कहा, राजनीतिक मतभेदों के बावजूद अजित पवार उनके लिए पितातुल्य हैं। उन्होंने कहा, 2019 के चुनाव में उन्होंने मेरी बहुत मदद की और चूंकि वह मेरे चाचा हैं, इसलिए उनके पैर छूना मेरा फर्ज है। यह भूमि चव्हाण साहब की है और उनके द्वारा दी गई परंपरा एवं मूल्यों का पालन करने की जरूरत है तथा हम वही कर रहे हैं। अजित पवार के स्नेह भरे परिहास के बारे में पूछे जाने पर रोहित पवार ने कहा कि यह सच है कि अगर उनके चाचा ने कर्जत जामखेड में रैली की होती तो चीजें अलग होतीं। उन्होंने कहा, लेकिन वह बारामती में व्यस्त थे और उन्हें निर्वाचन क्षेत्र में आने का समय नहीं मिल सका। रोहित पवार ने कहा कि वह हाल के चुनावों में उपमुख्यमंत्री के प्रदर्शन के लिए उन्हें बधाई देते हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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