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Sambhal Violence Updates: 'पुलिस कर्मियों को जिंदा जलाने की कोशिश...' हथियारों से लैस होकर आई थी भीड़; संभल हिंसा की FIR में चौंकाने वाले खुलासे

Sambhal Violence FIR Copy Hindi News Updates: संभल हिंसा मामले में पुलिस ने 7 एफआईआर दर्ज की हैं। इसमें कहा गया है कि हिंसक भीड़ का मंसूबा पुलिसकर्मियों को जिंदा जलाने और जान से मारने का था। एक साजिश के तहत पुलिस पर पत्थरबाजी की गई। योजनाबद्ध तरीके से जामा मस्जिद सर्वे को बाधित करने का प्रयास किया गया।

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संभल में मस्जिद सर्वे के दौरान हिंसा।

Photo : ANI

Sambhal Violence FIR Copy, UP Sambhal Violence Latest Updates in Hindi: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में जामा मस्जिद सर्वे के विरोध में भड़की हिंसा में चार लोगों की मौत हो चुकी है। आगजनी और पत्थरबाजी में कई पुलिसकर्मी घायल भी हुए थे, जिसमें पुलिस ने कुल 7 एफआईआर दर्ज की हैं। इन एफआईआर में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, हिंसक भीड़ का मंसूबा पुलिसकर्मियों को जिंदा जलाने और जान से मारने का था।

पुलिस की एफआईआर (Sambhal Violence FIR Copy) में सामने आया है कि एक साजिश के तहत पुलिस पर पत्थरबाजी की गई। योजनाबद्ध तरीके से जामा मस्जिद सर्वे को बाधित करने का प्रयास किया गया। करीब 700 से 800 लोग वहां इकट्ठा हुए। एफआईआर के मुताबिक, ये भीड़ घातक हथियारों से लैस थी।

SI से पिस्तौल छीनने की कोशिश, लूट ले गए कारतूस

FIR के मुताबिक, भीड़ ने एक सब इंस्पेक्टर से पिस्तौल छीनने की कोशिश की। इतना ही नहीं 25 ब्लैंक कारतूस और 25 रबर बुलटे लूट कर ले गए। भीड़ के पास हथियार भी थे। पुलिस कर्मियों को जान से मारने की नीयत से हिंसक भीड़ ने उन पर फायरिंग भी की। एफआईआर में कहा गया है कि 40-50 लोग नाम लेकर पुलिस से हथियार छीनने के लिए बोल रहे थे। इस दौरान पुलिसकर्मियों को आग लगाकर मारने की भी आवाजें सुनाई दीं।

सपा सांसद बर्क व पार्टी विधायक के बेटे पर मुकदमा

संभल हिंसा मामले (Sambhal Violence Case) में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क व संभल सदर से सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। दोनों पर भीड़ को उकसाने का आरोप है। एफआईआर में कहा गया है कि सपा सांसद जियाउरर्हमान बर्क ने भड़काउ बयानबाजी की और सपा विधायक के बेटे सुहैल इकबाल ने भीड़ को उकसाया और कहा कि हम तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारा कुछ नहीं होने देंगे। इसके बाद भीड़ ने पत्थरबाजी की। बता दें, इस मामले में पुलिस ने अब तक 25 लोगों को गिरफ्तार किया है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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