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"भारत का विश्वगुरु बनना तय, देश के भविष्य पर संदेह न करें", नागपुर में बोले मोहन भगवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत का भविष्य उज्ज्वल है और वह निश्चित रूप से विश्वगुरु बनेगा। उन्होंने राम मंदिर निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह यह संकल्प पूरा हुआ, उसी तरह भारत का वैश्विक नेतृत्व भी तय है।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत

Photo : ANI

Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि भारत निश्चित रूप से विश्वगुरु बनेगा और देश के भविष्य के बारे में किसी को भी कोई संदेह नहीं रखना चाहिए। भागवत ने कहा, "पहले लोगों को संदेह था कि राम मंदिर कभी बनेगा भी या नहीं, लेकिन उसका निर्माण हुआ। इसी तरह, भारत का विश्वगुरु बनना भी तय है।" आरएसएस प्रमुख ने नागपुर शहर के बाहरी इलाके जामथा में राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनसीआई) के परिसर में 'भारत दुर्गा शक्ति स्थल' के भूमि पूजन के बाद यह बात कही।

"भारत के भविष्य पर संदेह न करें"

भागवत ने कहा कि भारत के विश्वगुरु बनने का सपना निरंतर प्रयासों और सामूहिक अनुशासन के माध्यम से साकार होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि इस तरह का परिवर्तन वर्तमान पीढ़ी में देखा जा सकता है। संघ प्रमुख ने कहा कि भारत के भविष्य को लेकर किसी भी तरह का संदेह मन से निकाल देना चाहिए। उन्होंने कहा, "भारत के भविष्य पर संदेह न करें। साहस और आत्मनिर्भरता के साथ जिएं तथा इन मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं। भारत मजबूत बनेगा और दुनिया का मार्गदर्शन करेगा।"

राम मंदिर आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा ये

भागवत ने राम मंदिर आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा, "लोगों को संदेह था कि राम मंदिर बनेगा या नहीं, लेकिन यह बना। इसी तरह, भारत का विश्वगुरु बनना तय है। इस बात को लेकर कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि कोई चीज होगी या नहीं होगी। जो होना तय है, वह होकर रहेगा।" उन्होंने कहा, "यदि हम अपने संकल्प के अनुसार कदम दर कदम कार्य करते रहें, तो भारत मजबूत, सदाचारी और वैश्विक मार्गदर्शक बनेगा।" भागवत ने कहा कि भारत को सही मायने में समझने के लिए लोगों को पहले भारत में गहराई से झांकना होगा। उन्होंने कहा, "भारत माता की पूजा करने के लिए हमें खुद भारत बनना होगा।"

नागरिकों से किया यह आग्रह

RSS प्रमुख ने कहा कि देश को उसके सभ्यतागत मूल्यों के आधार पर समझा जाना चाहिए, न कि 150 वर्षों में विकसित औपनिवेशिक या पश्चिमी दृष्टिकोण से। उन्होंने नागरिकों से "पश्चिमी सोच को त्यागने" और विचार एवं आचरण के मामले में भारतीय परंपराओं से फिर से जुड़ने का आग्रह किया। भागवत ने कहा कि यह परिवर्तन दैनिक जीवन में छोटे, लेकिन सार्थक बदलावों से शुरू होगा, जैसे कि भाषा, पहनावा, खान-पान की आदतें और सांस्कृतिक प्रथाएं। उन्होंने कहा कि भारत माता की पूजा का विचार केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए व्यक्तियों को अपने जीवन में स्वयं को भारत के स्वरूप में ढालने की आवश्यकता होती है।

नागपुर में 'भारत माता' मंदिर के निर्माण का विचार

भागवत ने कहा कि नागपुर में 'भारत माता' मंदिर के निर्माण का विचार दिवंगत मोरोपंत पिंगले ने दिया था। उन्होंने कहा कि यह विचार तब आया, जब एकता यात्रा के दौरान भारत माता की मूर्तियों को भारत के विभिन्न मार्गों से ले जाया गया था। भागवत ने कहा, "उस समय नागपुर में भारत माता मंदिर के निर्माण का विचार मोरोपंत पिंगले के मन में आया था। यह मेरा विचार नहीं था।" उन्होंने यात्रा में शामिल चार मूर्तियों में से एक अंततः नागपुर पहुंची, लेकिन अन्य आंदोलनों ने लोगों को दशकों तक व्यस्त रखा, जिससे परियोजना में देरी हुई।

"भारत माता को दुर्गा के रूप में होना चाहिए"

भागवत ने कहा कि इस अस्पताल में अब भारत माता का मंदिर भी शामिल है, जो शक्ति, ज्ञान और बुद्धिमत्ता का प्रतीक है। उन्होंने कहा, "वंदे मातरम् से प्रेरित होकर मुझे लगा कि भारत माता को दुर्गा के रूप में होना चाहिए, जो दस भुजाओं वाली शक्ति की देवी हैं। शक्ति के बिना, अकेले सत्य संसार में विजय प्राप्त नहीं कर सकता।" भागवत ने कहा कि भले ही भारत की अवधारणा सत्य पर आधारित हो, लेकिन बाकी दुनिया अक्सर इस सिद्धांत का पालन करती है कि जिसके पास सत्ता है, वही सही है।

कई धर्मगुरु रहे मौजूद

इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अलावा गुरुशरणजी महाराज, स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज, स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, स्वामी मित्रानंदजी महाराज, साध्वी ऋतंभरा और धीरेंद्र शास्त्री सहित कई धर्मगुरु मौजूद थे। गडकरी ने कहा कि मंदिर का भूमि पूजन सभी के लिए सौभाग्य का पल है। उन्होंने कहा, "इस पहल के पीछे की प्रेरणा राष्ट्र निर्माण है। इससे पूरे देश को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा मिलेगी।" स्वामी अवधेशानंद गिरि ने भगवत के सौम्य स्वभाव और असाधारण नेतृत्व की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, "भारत सिर्फ एक भूमि नहीं है, बल्कि एक देवी है, इसलिए इसकी पूजा की जानी चाहिए।"

(इनपुट - भाषा)

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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