IAF Exercise : भारतीय वायु सेना (IAF) आने वाले दिनों में राजस्थान में पाकिस्तान से लगने वाली अपनी सीमा में दो बड़े युद्धाभ्यास करने जा रही है। IAF का पहला युद्धाभ्यास नौ सितंबर से शुरू होगा और इसमें भारत और जापान के लड़ाकू विमान अपनी ताकत दिखाएंगे। इस युद्धाभ्यास का नाम 'इंडिया-जापान वीर गॉर्डियन 26' है। रिपोर्टों के मुताबिक इस ड्रिल के बाद भारतीय वायु सेना अगले महीने बहुराष्ट्रीय तरंग शक्ति 2026 युद्धाभ्यास करेगी। यह मेगा ड्रिल जोधपुर एवं पश्चिमी राजस्थान के वायु ठिकानों के आस-पास होगा।
युद्धाभ्यासों से पाकिस्तान की नींद उड़नी तय
पाकिस्तानी सीमा के पास होने जा रहे इन दोनों युद्धाभ्यासों से पाकिस्तान की नींद उड़नी तय है। ये युद्धाभ्यास 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद होने जा रहे हैं। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तानी वायु सेना के दांत खट्टे कर दिए थे। अपने हमलों से आईएएफ ने पाकिस्तान वायु सेना को पंगु बना दिया था।
भारत में पहली बार ताकत दिखाएंगे जापान के फाइटर प्लान
इन युद्धाभ्यासों को पिछले साल हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के साथ जारी तनाव के बीच भारत की सैन्य ताकत के प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। उस दौरान भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने लंबी दूरी के स्टैंड-ऑफ हथियारों का इस्तेमाल करते हुए LoC पार किए बिना पाकिस्तान के अंदर काफी गहराई तक मौजूद ठिकानों को निशाना बनाया था। वीर गार्जियन अभ्यास में जापान की भागीदारी ने खासा ध्यान खींचा है। यह पहली बार होगा जब जापान के लड़ाकू विमान किसी अभ्यास के लिए भारतीय एयरबेस से ऑपरेट करेंगे।
हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से रिजर्व किया गया
रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारत की ओर से जारी नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) के अनुसार, 21 सितंबर से 7 अक्टूबर तक सैन्य गतिविधियों के लिए बड़े हिस्से के हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से रिजर्व किया गया है। यह क्षेत्र जैसलमेर- बाड़मेर- फलोदी- जोधपुर सेक्टर तक फैला हुआ है। इसके अलावा NAL-बीकानेर के आसपास का एयरस्पेस भी अभ्यास के लिए ब्लॉक किया गया है।
तरंग शक्ति 2026 में शामिल होंगे कई देश
NOTAM की अवधि तरंग शक्ति 2026 से भी मेल खाती है। सूत्रों के मुताबिक, IAF का यह बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर में आयोजित किया जाएगा। इस अभ्यास में कई देशों की वायुसेनाएं हिस्सा लेंगी। इसका उद्देश्य जटिल एयर-कॉम्बैट ड्रिल, आपसी समन्वय और इंटरऑपरेबिलिटी को बेहतर करना होगा। लगातार होने वाले इन दोनों युद्धाभ्यासों के चलते सितंबर से अक्टूबर तक पाकिस्तान सीमा से लगे राजस्थान के आसमान में लड़ाकू विमानों की गतिविधियां लगातार बनी रहने की संभावना है।
