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बिहार में क्या है 'बदमाशों को सीधे गोली मारो' वाला विवाद? जिसके चलते नीतीश सरकार पर भड़का विपक्ष

Bihar Politics: बिहार में नीतीश के मंत्री के उस बयान पर घमासान छिड़ा हुआ है, जिसमें उन्होंने अपराधी को गोली मारने की बात कही है। उनके बयान पर सियासी उठापटक का दौर तेज हो चुका है। लालू यादव की पार्टी राजद ने नीतीश सरकार पर हमला बोला है। आपको बताते हैं कि सारा विवाद क्या है।

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बिहार सरकार के मंत्री ने दिया नए विवाद को तूल।

Photo : Times Now Digital

RJD vs JDU: राष्ट्रीय जनता दल इन दिनों बिहार की कानून व्यवस्था को लेकर नीतीश सरकार पर हमलावर है। इसी मुद्दे पर सूबे के राजस्व और भूमि सुधार मंत्री डॉ दिलीप जायसवाल ने एक विवादित बयान दिया है, जिससे बिहार की सियासत में बवाल मच गया है। दिलीप जायसवाल ने कहा कि बिहार कैबिनेट में फैसला हुआ है कि प्रत्येक जिले में एसआईटी का गठन होगा। अलग से पुलिस बल का गठन हर जिले में हो रहा है। अवैध रूप से राइफल लेकर चलने वाले बदमाशों को सीधे गोली मारने के आदेश सरकार ने दे दिए हैं। पुलिस अब अवैध हथियार रख कर घूमने वाले को सीधे गोली मारेगी।

नीतीश के मंत्री ने दिया ऐसा बयान, मचा बवाल

दिलीप जायसवाल के इस बयान के बाद राजद ने बड़ा हमला बोला है। राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि दिलीप जयसवाल एक मंत्री हैं। मुख्यमंत्री और गृह मंत्री नहीं हैं। सीएम नीतीश के मंत्रिमंडल में मंत्री बने बैठे नेताओं की कितनी हैसियत है, सबको मालूम है। उन्होंने कहा कि सीएम नीतीश कुमार के साथ चार लोग, जो आगे पीछे चलते हैं, उन्हीं की सुनवाई होती है। उसके अलावा किसी की वहां नहीं चलती। बिहार की कमान एक बीमार हाथ में है। मंत्री कैसे कोई निर्णय लेगा? जब सरकार का निर्णय होगा तब हम जवाब देंगे।

सरकार पर कानून को अपने हाथ में लेने का आरोप

राजद प्रवक्ता अयाज अहमद ने दिलीप जायसवाल के बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि देखिए बिहार में किस तरह से सरकार चल रही है। इसका स्पष्ट रूप से प्रमाण मिलने लगा है। किस तरह से कानून को अपने हाथ में लेने का सरकार के स्तर से प्रयास हो रहा है। बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल के इस बयान से समझा जा सकता है। सबको मालूम है भारत में न्याय प्रक्रिया है। उसके बाद ही अपराधियों पर फैसला होता है।

'अपराधियों से वोट लीजिएगा तो गोली किसको मारिएगा?'

अपराधियों को देखते ही गोली मारने वाले बयान पर पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कहा कि ये काम जल्द से जल्द शुरू किया जाए। दिलीप जायसवाल के मुंह में घी-शक्कर। लेकिन पहले वह राजस्व विभाग को दलाली से मुक्त करा दें। सभी हमाम में नंगे हैं और अपराधी लोग ही एमपी-एमएलए बनाते हैं। अपराधियों से वोट लीजिएगा तो गोली किसको मारिएगा?

मंत्री के बयान पर नीतीश की पार्टी जदयू की प्रतिक्रिया

दिलीप जायसवाल के बयान पर जदयू की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आयी है। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि मंत्री ने यह बयान पूर्णिया के रुपौली में दिया है। रुपौली अपराध ग्रस्त क्षेत्र रहा है। अब रुपौली में कोई अपराध करने की हिम्मत नहीं करता। जनता ने अपना समर्थन पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार को दिया है। स्पीडी ट्रायल के जरिए सभी अपराधियों पर कार्रवाई तेज होगी।

वहीं यूपी कांग्रेस प्रदेश अजय राय का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह बेवकूफ टाइप के लोग हैं। ये बड़बोलापन है। अपराधियों पर न्यायसंगत तरीके से कार्रवाई करिए। सरकार में बैठे लोग दंड नहीं दे सकते, वह न्यायपालिका देगी। इस तरीके की बात कहना बचकाना बात है। ऐसे लोगों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कार्रवाई करनी चाहिए।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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