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लालू की पार्टी ने मुसलमानों के लिए 30 सालों में कुछ नहीं किया; पीके ने ये कहकर राजद पर साधा निशाना

Prashant Kishore Slams RJD: बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में सियासी वार-पलटवार का सिलसिला तेज हो चुका है। इस बीच जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने लालू यादव की पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने 30 सालों में मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया।

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प्रशांत किशोर (File Photo)

Photo : BCCL

Bihar Politics: जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने मंगलवार को किशनगंज में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने लोगों से आगामी विधानसभा चुनाव में लालू यादव और नीतीश कुमार के चेहरे नहीं, बल्कि अपने बच्चों की शिक्षा और रोजगार के लिए वोट करने की अपील की।

पीके का दावा- राजद ने 30 सालों में मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया

प्रशांत किशोर किशनगंज जिले के पौवाखाली के हाई स्कूल मैदान में जन सुराज उद्घोष यात्रा के तहत एक जनसभा को संबोधित करने पहुंचे। उन्होंने लोगों से आगामी विधानसभा चुनाव में सोच-समझ कर वोट करने की अपील की। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर जुबानी हमला करते हुए उन्होंने मुस्लिम वोटर्स को साधने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि बिहार में मुस्लिम समुदाय भाजपा के डर से लालटेन को वोट देता है, राजद ने 30 सालों में मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया, मुसलमान सिर्फ केरोसिन तेल की तरह लालटेन में जल रहा है और रोशनी कहीं और हो रही है।

उन्होंने कहा, 'राजद मुसलमानों का रहनुमा होने का दावा करती है, लेकिन पार्टी ने 30 सालों में मुस्लिम समाज के विकास के लिए कुछ नहीं किया। बिहार में मुस्लिम समुदाय के लोग अपना हक मांगने के लिए वोट नहीं देते, बिहार में मुसलमान भाजपा के डर से लालटेन को वोट देते हैं।'

मुसलमानों को भाजपा से डरना छोड़ देना चाहिए- प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर ने कहा, 'मुस्लिम समुदाय 30 वर्षों से लालटेन को वोट देता आ रहा है, लेकिन न तो उनका विकास हुआ, न ही उन्हें राजनीतिक भागीदारी मिली और न ही वे अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भाजपा को हरा पाए। अब समय आ गया है कि मुसलमानों को भाजपा से डरना छोड़ देना चाहिए, अपने और अपने बच्चों के अधिकारों के लिए वोट देना चाहिए।'

जनता से अपील करते हुए उन्होंने कहा, 'अगली बार वोट लालू, नीतीश के चेहरे पर नहीं अपने बच्चों के चेहरे को देखकर दीजिएगा। जनता उन्हें और उनके बच्चों को लूटने वाले नेताओं को वोट न दें। अगली बार अपने बच्चों के लिए वोट दें और बिहार में जनता का राज स्थापित करें।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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