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दिल्ली हाईकोर्ट से सीएम रेखा गुप्ता को बड़ी राहत, AI जनरेटेड डीपफेक वीडियो और पोस्ट हटाने का आदेश

याचिका में AI जनरेटेड डीपफेक वीडियो, तस्वीरों और पोस्ट के प्रसार पर रोक लगाने के साथ-साथ नुकसान की भरपाई के लिए हर्जाने की भी मांग की गई थी। मुख्यमंत्री की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता समीर रोहतगी पेश हुए।

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दिल्ली हाईकोर्ट से सीएम रेखा गुप्ता को बड़ी राहत (फाइल फोटो)

दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को बड़ी अंतरिम राहत देते हुए आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया अकाउंट्स से पोस्ट किए गए AI जनरेटेड वीडियो, तस्वीरों और पोस्ट को हटाने का आदेश दिया है। जस्टिस मनोज जैन की पीठ ने मुख्यमंत्री को शराब विक्रेता, फेरीवाले और डिलीवरी एजेंट के रूप में दिखाने वाले आपत्तिजनक कंटेंट पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि राजनीतिक व्यंग्य और हास्य की भी एक सीमा होती है। किसी व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाने और उसे अपमानित करने की इजाजत राजनीतिक व्यंग्य के नाम पर नहीं दी जा सकती।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि और व्यक्तित्व के अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया था। याचिका में AI जनरेटेड डीपफेक वीडियो, तस्वीरों और पोस्ट के प्रसार पर रोक लगाने के साथ-साथ नुकसान की भरपाई के लिए हर्जाने की भी मांग की गई थी। मुख्यमंत्री की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता समीर रोहतगी पेश हुए।

AI वीडियो में शराब बेचने वाली के तौर पर दिखाया गया

मुख्यमंत्री की ओर से अदालत को बताया गया कि आम आदमी पार्टी के आधिकारिक और वेरिफाइड सोशल मीडिया अकाउंट्स से कई AI जनरेटेड वीडियो और पोस्ट साझा किए गए। इनमें रेखा गुप्ता को शराब विक्रेता, फेरीवाले और डिलीवरी एजेंट के रूप में दिखाया गया। कुछ कंटेंट में उन्हें कथित तौर पर 'हर हर रेखा, घर घर ठेका' योजना की प्रमुख के रूप में भी प्रदर्शित किया गया, जबकि ऐसी कोई योजना अस्तित्व में नहीं है।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि ये वीडियो और तस्वीरें केवल सरकार की आबकारी नीति या किसी प्रशासनिक फैसले की आलोचना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत गरिमा, प्रतिष्ठा और नैतिक चरित्र को निशाना बनाने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।

अदालत को यह भी बताया गया कि एक वीडियो में मुख्यमंत्री को रात के समय पुरुषों को शराब परोसते हुए दिखाया गया है। इसके बैकग्राउंड में रोमांटिक संगीत और झगड़े जैसे दृश्य भी दिखाए गए हैं। याचिकाकर्ता के मुताबिक, इस तरह का चित्रण बेहद अपमानजनक, कलंकित करने वाला और मानहानिकारक है।

'राजनीतिक व्यंग्य और आपत्तिजनक चित्रण के बीच एक महीन रेखा'

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राजनीतिक नेताओं को आलोचना और व्यंग्य का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी राजनीतिक दल को सरकार की नीतियों, फैसलों और प्रशासनिक कार्रवाई की आलोचना करने का अधिकार है। लेकिन राजनीतिक असहमति जताने के नाम पर किसी व्यक्ति की गरिमा को चोट पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

अदालत ने कहा, "राजनीतिक व्यंग्य और आपत्तिजनक चित्रण के बीच हमेशा एक महीन रेखा होती है।" कोर्ट ने आगे कहा कि केवल हास्य या व्यंग्य के मामले में अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती, लेकिन जब किसी व्यक्ति की गरिमा पर हमला किया जाता है, उसे अपमानित किया जाता है और उसका मजाक उड़ाया जाता है, तो अदालत का कर्तव्य है कि वह उचित कदम उठाए।

अदालत ने कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति को निश्चित रूप से अधिक आलोचना और निगरानी का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी व्यक्तिगत गरिमा से समझौता किया जा सकता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और हास्य की आड़ में किसी को अपमान और उपहास का पात्र नहीं बनाया जा सकता।

AI तकनीक के इस्तेमाल पर कोर्ट की अहम टिप्पणी

हाईकोर्ट ने AI तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि आधुनिक तकनीक के जरिए वीडियो तैयार करना लगातार आसान होता जा रहा है। किसी व्यक्ति की तस्वीर और व्यक्तित्व का इस्तेमाल कर ऐसे वीडियो बनाए जा सकते हैं, जो वास्तविक और लगभग हूबहू प्रतीत होते हैं।अदालत ने कहा कि राजनीतिक व्यंग्य और आपत्तिजनक चित्रण के बीच अंतर समझना जरूरी है। स्वस्थ आलोचना और व्यंग्य स्वीकार्य हैं, लेकिन मुख्यमंत्री को इस तरह दिखाने वाले AI जनरेटेड वीडियो और पोस्ट ने उस सीमा का उल्लंघन किया है।कोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी नीति या फैसले के प्रति असहमति जताने के नाम पर AI वीडियो के जरिए मुख्यमंत्री का आपत्तिजनक चित्रण किसी भी तरह से स्वीकार्य राजनीतिक व्यंग्य के दायरे में नहीं आता।

एक वीडियो को मिले थे 75 हजार से ज्यादा व्यूज

सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री की ओर से अदालत को बताया गया कि 4 नवंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किए गए एक वीडियो को स्क्रीनशॉट लिए जाने के समय तक करीब 75 हजार व्यूज, 1,600 लाइक्स और 470 री-पोस्ट मिल चुके थे। अन्य वीडियो और पोस्ट को भी बड़ी संख्या में लाइक्स और कमेंट्स मिले थे। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि सोशल मीडिया पर इस तरह की सामग्री तेजी से प्रसारित होती है और इससे होने वाली प्रतिष्ठा की क्षति की भरपाई केवल आर्थिक मुआवजे से नहीं की जा सकती।अदालत ने भी कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस तरह की सामग्री बिजली की गति से फैलती है। ऐसे में याचिकाकर्ता ने प्रथम दृष्टया अपना मामला साबित किया है और सुविधा का संतुलन भी उसके पक्ष में है।

AAP की ओर से कोई पेश नहीं हुआ

सुनवाई के दौरान आम आदमी पार्टी और अन्य प्रतिवादियों की ओर से कोई भी अदालत में पेश नहीं हुआ। अदालत ने दर्ज किया कि प्रतिवादियों को पहले ही अग्रिम नोटिस दिया गया था। मुख्यमंत्री की ओर से बताया गया कि प्रतिवादियों को सुबह करीब 9:30 बजे और रजिस्ट्री की आपत्तियां दूर करने के बाद दोबारा करीब 11:30 बजे ईमेल के जरिए अग्रिम सूचना दी गई थी। इसके बावजूद कोई पक्ष अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए उन्हें समन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

छह सोशल मीडिया URL तत्काल हटाने का आदेश

हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए अपने आदेश में छह आपत्तिजनक URL को तत्काल हटाने का निर्देश दिया है। ये URL आम आदमी पार्टी के आधिकारिक X अकाउंट और फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट किए गए वीडियो और पोस्ट से संबंधित हैं।

अदालत ने प्रतिवादी नंबर 3, 4 और 5 को संबंधित छह URL तत्काल हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 39 नियम 3 के अनुपालन का भी निर्देश दिया है। मामले में आगे की सुनवाई के लिए 4 दिसंबर की तारीख तय की गई है।

समीर रोहतगी बोले- AI के जरिए किसी राजनीतिक व्यक्ति की हूबहू नकल करने की चुनौती पर अहम आदेश

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की ओर से पेश अधिवक्ता समीर रोहतगी ने इस आदेश को AI जनरेटेड कंटेंट और किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा एवं गरिमा के अधिकार के बीच संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया।रोहतगी के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट का यह आदेश किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और गरिमा के अधिकार तथा AI जनरेटेड सिंथेटिक कंटेंट के इस्तेमाल के बीच संतुलन स्थापित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यह उन शुरुआती महत्वपूर्ण आदेशों में से एक है, जिनमें AI के जरिए किसी राजनीतिक व्यक्ति की शख्सियत की हूबहू और बेहद वास्तविक नकल तैयार करने से पैदा होने वाली चुनौतियों पर विचार किया गया है।उन्होंने कहा कि अदालत ने प्रथम दृष्टया पाया है कि संबंधित कंटेंट अपमानजनक है और व्यक्ति की गरिमा को चोट पहुंचाता है। इसे किसी भी सूरत में स्वीकार्य राजनीतिक व्यंग्य के दायरे में नहीं रखा जा सकता।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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