जलवायु कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने शनिवार को लद्दाख के उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन पर उनकी और अन्य आलोचकों की सुनियोजित तरीके से छवि खराब करने का आरोप लगाया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की।यह अपील वांगचुक से जुड़े संस्थानों के खिलाफ की गई कई प्रशासनिक कार्रवाइयों के बीच की गई है। इनमें अगस्त 2025 में हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स (एचआईएएल), लद्दाख की जमीन का पट्टा रद्द करना भी शामिल है।
लद्दाख प्रशासन ने पट्टा रद्द करने के पीछे यह वजह बताई थी कि तय समय सीमा में पट्टे के दस्तावेज तैयार नहीं किए गए और जरूरी प्रीमियम राशि भी जमा नहीं की गई। इसके अलावा, प्रशासन ने जमीन को निर्धारित उद्देश्य के अनुसार इस्तेमाल नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया था।
प्रशासन ने एचआईएएल को अपने डेजर्ट फ्लावर स्कूल के संचालन से जुड़ी आगे की गतिविधियां रोकने का भी निर्देश दिया है।इसी बीच, शनिवार को लेह की श्रम अदालत ने एचआईएएल की एक पूर्व कर्मचारी को मातृत्व लाभ का कानूनी भुगतान नहीं करने और उसके साथ अनुचित व्यवहार करने के आरोपों से जुड़े मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।वांगचुक और उनकी पत्नी तथा एचआईएएल की सह-संस्थापक एवं सीईओ गीतांजलि जे. अंगमो ने जमीन के सौदे को अंतिम रूप देने में हुई देरी के लिए नौकरशाही की अड़चनों को जिम्मेदार ठहराया है।
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'जमीन का पट्टा रद्द करना राजनीतिक बदले की कार्रवाई'
उन्होंने आरोप लगाया है कि जमीन का पट्टा रद्द करना राजनीतिक बदले की कार्रवाई है। उनके मुताबिक, इसका संबंध लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा और पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के अभियान से है।उन्होंने यह दावा भी किया कि लद्दाख के नेताओं की छवि खराब करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियानों में देश के संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। राष्ट्रपति को भेजी गई अपनी अपील में वांगचुक ने लद्दाख के शासन से जुड़े बड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उपराज्यपाल प्रशासन के तहत लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की आजादी पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं।उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर केवल टिप्पणी करने या किसी पोस्ट को लाइक करने पर भी प्राथमिकी दर्ज की जा रही हैं और लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है।
कई प्रशासनिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन, उद्योग, बिजली और पर्यटन से जुड़ी नीतियां स्थानीय लोगों के हितों के बजाय कॉरपोरेट कंपनियों के हितों को फायदा पहुंचा रही हैं।वांगचुक ने राष्ट्रपति मुर्मू से अपील की कि वह लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश समेत सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों के लिए समान अधिकार, लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और न्याय सुनिश्चित करें। वांगचुक के आरोपों पर उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
