अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन मामले की जांच के तहत पुलिस ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बयान दर्ज किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की जांच जारी है।
चंपत राय के बयान को लेकर पुलिस ने क्या बताया
पुलिस अधिकारियों ने यह तो स्वीकार किया कि चंपत राय का बयान दर्ज किया गया है, लेकिन पूछताछ कब, कहां और कितनी देर तक चली, इस बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की। सूत्रों के मुताबिक, जांच का नेतृत्व कर रहे अयोध्या के क्षेत्राधिकारी (सीओ) आशुतोष तिवारी ने कारसेवकपुरम स्थित चंपत राय के 'भारत कुटी' आवास पर पहुंचकर उनका बयान दर्ज किया।
सूत्रों के अनुसार, इस दौरान पुलिस ने चंपत राय से कथित गबन से जुड़ी जानकारी और संबंधित दस्तावेज मांगे। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ट्रस्ट को इस कथित अनियमितता की जानकारी कब मिली और इसके बाद क्या कार्रवाई की गई।
चंपत राय से इस बारे में तब पूछताछ की गई है, जब कुछ दिन पहले ही चंपत राय ने इस विवाद की 'नैतिक जिम्मेदारी' लेते हुए अपना इस्तीफा सौंपा था।
दावा यह भी किया जा रहा है कि ट्रस्ट को 7 जून से पहले ही कथित गड़बड़ी की जानकारी मिल गई थी। हालांकि, इस मामले में प्राथमिकी 25 जून को दर्ज की गई। इसी बीच पांच जून का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें आरोपी अविनाश शुक्ला के घर से कथित तौर पर दान की राशि से भरा बैग बरामद होने का दावा किया गया था।
सात जून को अखिलेश ने उठाये थे सवाल
बता दें कि यह विवाद सात जून को तब राजनीतिक मुद्दा बन गया, जब समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का आरोप लगाया। उस समय चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ट्रस्ट की आंतरिक जांच में कोई बड़ी अनियमितता सामने नहीं आई है।
13 जून को एसआईटी हुई गठित
हालांकि बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। सूत्रों के मुताबिक, SIT की प्रारंभिक जांच में दान संग्रह और गणना से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के कई उल्लंघन सामने आए हैं। इनमें सुरक्षा जांच में लापरवाही, सीसीटीवी फुटेज निर्धारित अवधि तक सुरक्षित नहीं रखना और दानपात्रों की चाबियों के रखरखाव में गंभीर खामियां शामिल हैं।
आठ लोग हुए गिरफ्तार
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई और दान की गणना प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं।
बरामद किए गए करीब 80 लाख रुपये
पुलिस के अनुसार, अब तक सात आरोपियों के कब्जे से करीब 80 लाख रुपये नकद और कुछ विदेशी मुद्रा बरामद की जा चुकी है। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव, जो चंपत राय का पूर्व चालक रह चुका है, उसके पास कई दानपात्रों की चाबियां थीं, जो निर्धारित एसओपी के विपरीत है।
इसी क्रम में मंगलवार को अदालत की अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने जिला जेल में बंद मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से भी पूछताछ की। जांच एजेंसियां अब कथित गबन की पूरी साजिश, धन के प्रवाह और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
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