राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में आज सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर (Ram Mandir)में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के पुनर्गठन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त करने का निर्देश दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत चाहेगी कि इस मामले की जांच की कमान किसी ऐसे वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारी को सौंपी जाए, जिसे इस तरह की जटिल और गंभीर जांचों को संभालने का व्यापक अनुभव हो।
SIT गठन पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता से पूछा कि क्या इस मामले की पारदर्शी जांच के लिए एक नई विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया जा सकता है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि SIT का गठन किया जाएगा और इस संबंध में पूरी विस्तृत जानकारी अगली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
अब तक की जांच की स्थिति
SG तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि शुरुआत में मामले की प्राथमिक जांच के लिए SIT बनाई गई थी। SIT के निष्कर्ष में यह पाया गया कि यह एक संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) है, जिसके आधार पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर वर्तमान में आगे की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। सरकार की ओर से अदालत में स्थिति रिपोर्ट (Status Report) दाखिल कर दी गई है। SG ने बताया कि इस मामले में अब तक 8 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।
राजनीति पर CJI की सख्त टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सभी पक्षों को कड़ा संदेश देते हुए कहा, "इस मामले को राजनीतिक रंग न दिया जाए। अदालत राजनीति करने की जगह नहीं है। यह एक सामान्य आपराधिक मामले की जांच का विषय है और हमारा मुख्य उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हो।"
