Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर दान घोटाले में रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। इस घोटाले में फंसे टिन्नू यादव को लेकर एक नई बात सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक महज 27 हजार रुपये महीना कमाने वाले टिन्नू यादव के बेटे की शादी बहुत धुमधाम से की थी। शादी में पानी की तरह बहाया गया पैसा और मेहमानों को महंगे रिटर्न गिफ्ट दिए गए।
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रिटर्न गिफ्ट पर खर्च किए लाखों
जानकारी के मुताबिक, बीते 19 फरवरी को टिन्नू यादव के बेटे की शादी संपन्न हुई थी। इस शादी समारोह में शामिल होने आए मेहमानों का स्वागत बेहद शाही अंदाज में किया गया। विदाई के वक्त शादी में आने वाले लोगों को रिटर्न गिफ्ट के तौर पर एक मिठाई का डिब्बा और साड़ी का पैकेट दिया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि शादी में कुल 1,000 साड़ियों के पैकेट बांटे गए। बाजार में एक साड़ी के पैकेट की कीमत करीब 500 रुपये तक थी। इस हिसाब से देखा जाए तो टिन्नू यादव ने केवल साड़ियों के रिटर्न गिफ्ट पर ही करीब 5 लाख रुपये खर्च कर दिए। अब लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि ₹27,000 मासिक तनख्वाह (सैलरी) पाने वाले टिन्नू यादव ने सिर्फ उपहारों पर इतनी बड़ी रकम कैसे खर्च कर दी।
कहां तक पहुंची SIT जांच?
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में एसआईटी (SIT) की जांच तेज हो गई है, जिसके तहत ट्रस्ट के डॉ. अनिल मिश्रा को समन भेजे जाने की खबर सूत्रों से मिल रही है। एसआईटी इस मामले में बैंक अधिकारियों और कैश काउंटिंग एजेंसी से पूछताछ करने के साथ-साथ बैंक स्टेटमेंट व अन्य वित्तीय रिकॉर्ड्स को खंगालने में जुटी है; इसी सिलसिले में सोमवार को एक ही दिन में दो बार पूछताछ करने के बाद कल भी गोपाल राव से दोबारा सवाल-जवाब किए गए और साथ ही टिन्नू यादव से भी पूछताछ कर एसआईटी उनके बयानों और रिकॉर्ड्स का मिलान कर रही है।
संत समाज दुखी
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा घपला मामले पर नाका हनुमान गढ़ी के महंत राम दास ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इस घोटाले की खबर से संत समाज बेहद दुखी है, क्योंकि देशभर के राम भक्तों ने मंदिर के लिए करोड़ों रुपये का चंदा दिया था। उन्होंने ट्रस्ट में गलत लोगों के चुनाव पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अनिल मिश्रा और चंपत राय कौन से संत हैं जिन्हें ट्रस्ट में रखा गया? साथ ही उन्होंने मांग की कि चढ़ावे की गिनती में पारदर्शिता न बरतने के कारण जिन लोगों पर आरोप लग रहे हैं, उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए, इस पूरे मामले में मुकदमा दर्ज होना चाहिए और पारदर्शिता के लिए बैंक की शाखा को मंदिर परिसर के अंदर ही होना चाहिए था।
