राम मंदिर के चंदे में कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले पर ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद सुनवाई की जाएगी। सर्वोच्च न्यायालय 13 जुलाई से दोबारा खुलेगा।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए मौखिक टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि आसमान गिरने वाला नहीं है... इतनी जल्दी क्या है?
यह याचिका अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की ओर से दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासन, वित्तीय लेन-देन और कथित अनियमितताओं की जांच सीबीआई के नेतृत्व वाली बहु-विषयक एसआईटी से कराई जाए।
याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर ट्रस्ट को नियामकीय, पर्यवेक्षी और लेखा-परीक्षा तंत्र स्थापित करने के निर्देश देने की भी मांग की है। उनका कहना है कि मामला केवल संभावित संज्ञेय अपराधों तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और दानदाताओं के विश्वास से भी जुड़ा हुआ है।
जनहित याचिकाओं पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में नहीं हो सकी सुनवाई
वहीं, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में सोमवार को अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा गबन और धन के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सम्बन्धी विभिन्न जनहित याचिकाओं पर सुनवाई नहीं हो सकी।
यह मामले न्यायमूर्ति मनीष माथुर और न्यायमूर्ति जफीर अहमद वाली अवकाशकालीन पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किये गये थे, लेकिन समय की कमी के कारण इन पर सुनवाई नहीं हो सकी। ये जनहित याचिकाएं पहले भी सूचीबद्ध की गई थीं जिनमें राम मंदिर में चढ़ावे के तौर पर मिले धन के कथित दुरुपयोग की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। याचिकाओं में अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि वह इस पूरे मामले की जांच कैग से कराने का निर्देश दे।
याचिकाओं में भक्तों द्वारा राम मंदिर में दिए गए दान के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं और मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
गौरतलब है कि 13 जून को राम मंदिर में प्राप्त दान के कथित दुरुपयोग के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। इस एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजीपी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है।
