Samudra Pradakshina Expedition: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को IASV त्रिवेणी की ऑल-वुमन (सर्व-महिला) त्रि-सेवा (Tri-Services) क्रू को 'समुद्र प्रदक्षिणा अभियान' सफलतापूर्वक पूरा करने पर सम्मानित किया। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने महिला अधिकारियों की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने केवल समुद्र को ही नहीं जीता, बल्कि उन सभी धारणाओं को भी गलत साबित कर दिया, जो मानती थीं कि बेटियां ऐसे कठिन अभियानों का हिस्सा नहीं बन सकतीं।
महिला अधिकारियों की तारीफ में क्या बोले राजनाथ सिंह?
रक्षा मंत्री ने कहा, "मैं पूरे देश की ओर से आप सभी का स्वागत करता हूं। आपने सिर्फ समुद्र पर विजय हासिल नहीं की, बल्कि उन लोगों को भी जवाब दिया है जो कहते थे कि हमारी बेटियां इतने कठिन अभियानों का हिस्सा नहीं बन सकतीं। आपने साबित कर दिया कि शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और नेतृत्व क्षमता का लिंग से कोई संबंध नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि आज भारत की हर बेटी इस उपलब्धि को देखकर यह विश्वास कर रही है कि वह न केवल समुद्र पार कर सकती है, बल्कि दुनिया की हर चुनौती का सामना भी कर सकती है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि IASV त्रिवेणी की ऑल-वुमन क्रू ने साहस, अनुशासन और उत्कृष्ट नेतृत्व का परिचय देकर देश का गौरव बढ़ाया है। उनकी यह सफलता भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व क्षमता का भी प्रतीक है।
मिशन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
करीब 314 दिनों तक चले इस अभियान में महिला अधिकारियों ने 25,500 समुद्री मील की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने चार महासागरों को पार किया और दुनिया के तीन सबसे चुनौतीपूर्ण केप—केप ऑफ गुड होप, केप लीउविन और केप हॉर्न के आसपास सफल नौवहन किया। इस मिशन के दौरान क्रू ने 60 नॉट तक की तेज हवाओं, पांच मीटर तक ऊंची लहरों, खराब मौसम और लंबे समय तक समुद्र में रहने जैसी कठिन चुनौतियों का सामना किया। अभियान के दौरान तकनीकी समस्याओं और सीमित संसाधनों के बावजूद टीम ने साहस, अनुशासन और उत्कृष्ट तालमेल का परिचय दिया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर महिला अधिकारियों को सम्मानित करते हुए कहा कि उन्होंने केवल समुद्र पर ही नहीं, बल्कि उन धारणाओं पर भी जीत हासिल की है जो महिलाओं की क्षमताओं पर सवाल उठाती थीं। उन्होंने कहा कि यह अभियान 'नारी शक्ति', संयुक्त सैन्य क्षमता और भारत की समुद्री शक्ति का प्रतीक है। यह अभियान भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय और महिलाओं की बढ़ती भूमिका का भी प्रतीक माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी की महिला सैन्य अधिकारियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
