Babita Dhakad Interrogation Updates: राजस्थान एटीएस (ATS) की गिरफ्त में आई जैश-ए-मोहम्मद की संदिग्ध महिला स्लीपर सेल बबीता धाकड़ उर्फ 'खदीजा' से पूछताछ में हर दिन बेहद चौंकाने वाले और देश की सुरक्षा को दहलाने वाले खुलासे हो रहे हैं। एटीएस सूत्रों के हवाले से आई ताजा खबर के मुताबिक, बबीता केवल सूचनाएं लीक करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि पाकिस्तानी हैंडलर्स उसे एक बेहद खौफनाक और बड़े आत्मघाती मिशन के लिए तैयार कर रहे थे।
इंटरनेट पर खोज रही थी 'फिदायीन हमला'
एटीएस की कस्टडी में बबीता के डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगालने पर सामने आया है कि वह इंटरनेट पर लगातार 'फिदायीन (आत्मघाती) हमले' को लेकर सर्च कर रही थी। पाकिस्तानी आकाओं द्वारा उसका इस कदर ब्रेनवाश किया जा चुका था कि वह खुद आत्मघाती हमले (Suicide Attack) की ट्रेनिंग ले रही थी।
इसके साथ ही, बबीता को 'हनी ट्रैप' (रूपजाल) की विशेष कला भी सिखाई गई थी। इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के जवानों और अधिकारियों को अपने जाल में फंसाना था, ताकि उनसे देश के सामरिक व संवेदनशील ठिकानों की गोपनीय जानकारियां उगलवाई जा सकें।
जैश की 'महिला विंग' के लिए लड़कियों की कर रही थी भर्ती
जांच एजेंसियों को पता चला है कि बबीता को जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग को खड़ा करने और उसे मजबूत करने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वह राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में सोशल मीडिया के जरिए युवा लड़कियों को टारगेट कर रही थी। वह कट्टरपंथी विचारों से उनका ब्रेनवाश कर उन्हें इस प्रतिबंधित आतंकी संगठन में भर्ती करने की कोशिश में जुटी हुई थी। सोशल मीडिया पर उसके कई संदिग्ध एकाउंट्स का पता चला है, जिनके जरिए वह एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से लगातार पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में बनी हुई थी।
पारिवारिक कलह और कोर्ट केस के बीच ऐसे दलदल में फंसी बबीता
एटीएस ने बबीता के इस आत्मघाती रास्ते पर कदम रखने के पीछे की वजहों को भी खंगाला है, जिसमें उसके व्यक्तिगत जीवन का एक तनावपूर्ण पहलू सामने आया है। जांच के मुताबिक:
-बबीता की शादी हिंडौन के रहने वाले सोनू धाकड़ से हुई थी, लेकिन शादी के बाद दोनों के रिश्तों में भारी खटास आ गई।
-पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ने के बाद यह मामला न्यायालय की चौखट तक पहुंच गया, जिसके बाद वर्ष 2018 से दोनों के बीच कानूनी लड़ाई चल रही है।
-वर्तमान में गंगापुरसिटी की एसीजेएम (ACJM) कोर्ट में भरण-पोषण (मेंटेनेंस) का केस और जेएम प्रथम न्यायालय में धारा 498-ए के तहत दहेज प्रताड़ना का मामला विचाराधीन है।
इसी पारिवारिक कलह, मानसिक तनाव और अदालती चक्करों के बीच अकेलेपन का फायदा उठाकर बबीता इंटरनेट पर कुछ ऐसे संदिग्ध समूहों और प्रोफाइल्स के संपर्क में आ गई, जो युवाओं को कट्टरपंथ (Radicalization) की ओर धकेलते हैं। इसी रास्ते से जैश के हैंडलर्स ने उसे अपने जाल में फंसाया और उसका ब्रेनवॉश कर 'खदीजा' उपनाम दे दिया।
पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी एजेंसियां
फिलहाल, एटीएस और केंद्रीय जांच एजेंसियां बबीता के पूरे नेटवर्क और उसके संपर्क सूत्रों की गहन पड़ताल कर रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसने अब तक कितनी लड़कियों से संपर्क साधा और देश के भीतर इस नेटवर्क में और कौन-कौन से चेहरे शामिल हैं। रिमांड की अवधि के दौरान इस मामले में कई और बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
