North East Railway Projects: पूर्वोत्तर में विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। रेलवे नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार ने 12 नई रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है जिनकी लागत 69,342 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं में 8 नई लाइनें और 4 डबलिंग प्रोजेक्ट शामिल हैं। कुल 777 किमी में से 278 किमी ट्रैक का काम पूरा हो चुका है। 2009-14 के मुकाबले अब बजट लगभग 5 गुना बढ़ाया गया है।
सरकार ने पूर्वोत्तर में रेलवे को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। 12 नई रेल परियोजनाएं मंजूर की गई हैं जिनकी कुल लंबाई 777 किलोमीटर होगी और इन पर करीब 69,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इनमें से 8 नई रेल लाइनें और 4 डबल लाइन प्रोजेक्ट हैं। अब तक 278 किलोमीटर ट्रैक का काम पूरा हो चुका है और 41,676 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
रेल नेटवर्क हो रहा सुदृढ़
| परियोजनाओं की संख्या | लंबाई | |
| नई लाइनें | 8 | 448 किलोमीटर |
| डबलिंग प्रोजेक्ट | 4 | 329 किलोमीटर |
| कुल | 12 | 777 किलोमीटर |
पूर्वोत्तर के लिए सरकार ने 5 गुना बढ़ाया बजट
2009 से 2014 के बीच हर साल 2,122 करोड़ रुपये खर्च होते थे, लेकिन अब 2025-26 के लिए यह बजट बढ़कर 10,440 करोड़ हो गया है। पहले हर साल औसतन 66 किलोमीटर नया ट्रैक बिछाया जाता था, जो अब बढ़कर 167 किलोमीटर प्रति वर्ष हो गया है। कुछ प्रमुख प्रोजेक्ट जैसे कि जिरीबाम-इम्फाल, दिमापुर-कोहिमा, और भैरबी-सैरांग रेल लाइनें भी बन रही हैं। इसके अलावा 17 नई सर्वे रिपोर्ट भी बनाई गई हैं, जिनसे भविष्य में और रेल प्रोजेक्ट शुरू किए जा सकेंगे।
उत्तर-पूर्व रेलवे पर भी 17 प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जिनकी कुल लंबाई 1,253 किलोमीटर है और 10,486 करोड़ खर्च हो चुके हैं। हालांकि, इन सभी परियोजनाओं को पूरा करने में जमीन अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी, मौसम और सुरक्षा जैसी कई चुनौतियां होती हैं, लेकिन सरकार का लक्ष्य है कि पूर्वोत्तर को बाकी भारत से बेहतर रेल संपर्क मिले ताकि विकास की रफ्तार तेज हो सके।
