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'राहुल गांधी आरक्षण खत्म करना चाहते हैं', BJP ने दिल्ली में लगाए पोस्टर

BJP vs Congress: अमेरिकी दौरे के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरक्षण के मुद्दे पर जो बयान दिया, उस पर सियासत अब तक गरमाई हुई है। दिल्ली के आईटीओ चौराहे पर भाजपा ने पोस्टर लगाए हैं, जिसमें लिखा है कि ‘राहुल गांधी आरक्षण खत्म करना चाहते हैं’। बीजेपी इस मुद्दे पर लगातार कांग्रेस को खरी-खोटी सुना रही है।

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राहुल गांधी पर भाजपा का तीखा प्रहार।

BJP Slams Rahul Gandhi: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को दिल्ली के आईटीओ चौराहे पर पोस्टर लगाया है। इसमें कहा गया है कि राहुल गांधी आरक्षण खत्म करना चाहते हैं। वह आरक्षण विरोधी हैं। पोस्टर में राहुल गांधी के बयान का हवाला देकर कहा गया है कि वह आरक्षण खत्म करने के बारे में विचार कर रहे हैं। वह नहीं चाहते हैं कि समाज का दबा-कुचला तबका आगे बढ़े।

राहुल के खिलाफ पोस्टर में क्या लिखा है?

पोस्टर में कहा गया है कि 2004 से लेकर 2010 तक कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में पिछड़ों का हक मारकर मुस्लिमों को आरक्षण देने का मार्ग प्रशस्त किया, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। भाजपा ने यह पोस्टर हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लगाया है। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस का असली चरित्र यही है कि वह किसी भी कीमत पर आरक्षण को खत्म करना चाहती है, लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे।

राहुल गांधी के किस बयान पर छिड़ा घमासान?

बता दें कि अमेरिकी दौरे के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित किया था। इस दौरान उनसे पूछा गया था कि भारत में आरक्षण की व्यवस्था कब तक जारी रहेगी। इस पर कांग्रेस नेता ने कहा था कि हम आरक्षण खत्म करने के बारे में जरूर सोचेंगे, लेकिन मुझे लगता है कि अभी उचित समय नहीं है। जब उचित समय आएगा, तो हम इस पर निसंदेह विचार विमर्श करेंगे।

अपने बयान को लेकर राहुल गांधी ने दी थी सफाई

राहुल के इस बयान का भाजपा, बसपा सहित अन्य दलित संगठन ने लोगों के बीच यह निहितार्थ निकालना शुरू किया कि अगर कांग्रेस सत्ता में आएगी, तो वो दलितों के हितों पर कुठाराघात करते हुए आरक्षण समाप्त कर देगी। इसके बाद राहुल गांधी ने अपने बयान को लेकर सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान का राजनीतिक गलियारों में गलत मतलब निकाला जा रहा है। वह आरक्षण विरोधी नहीं हैं।

कांग्रेस नेता ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, 'किसी ने मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया कि मैं आरक्षण के खिलाफ हूं, लेकिन मैं साफ कर दूं कि मैं आरक्षण के खिलाफ नहीं हूं। हम आरक्षण को 50 फीसद की सीमा से आगे लेकर जाएंगे।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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