देश

बिना लाग-लपेट Rahul Gandhi खाली करेंगे बंगला, बोले- मेरी सुनहरी यादें....

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 28, 2023, 01:48 PM IST

मोदी सरनेम मामले में राहुल गांधी को दोषी करार दिया गया था। उन्हें दो साल की सजा सुनाई गई है, जिसके बाद उनकी लोकसभा सदस्यता चली गई। सोमवार को राहुल गांधी को सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया गया था।

Image

राहुल गांधी

Photo : BCCL

Rahul Gandhi News: संसद से सदस्यता रद्द किए जाने के बाद राहुल गांधी को सरकारी बंगला खाली करने का भी नोटिस जारी किया गया है। उन्हें लोकसभा सचिवालय की ओर से बंगला खाली करने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। 27 मार्च को जारी इस नोटिस के तहत राहुल को 23 अप्रैल तक सरकारी बंगला खाली करना होगा।

इसके बाद मंगलवार को कांग्रेस नेता ने नोटिस का जवाब दिया है। राहुल गांधी ने अपने जवाब में लिखा है, 'मैंने एक अच्छा समय यहां पर बिताया है। उन्होंने कहा, पत्र में दिए गए विवरण का पालन किया जाएगा।

WhatsApp Image 2023-03-28 at 12.16.56.

WhatsApp Image 2023-03-28 at 12.16.56.

राहुल ने चिट्ठी में क्या लिखा

लोकसभा के डिप्टी सेक्रेटरी मोहित रंजन के नाम लिखी चिट्ठी में राहुल ने कहा, आवास वापस लिए जाने के संबंध में 27 मार्च को मिली चिट्ठी के लिए आपका धन्यवाद। पिछले चार बार से लोकसभा सांसद और जनता के जनादेश के रूप में मेरे पास यहां बिताए वक्त की सुनहरी यादें हैं। अपने अधिकारों के प्रति बिना किसी पूर्वाग्रह के मैं आपकी चिट्ठी में दिए गए विवरण का पालन करूंगा।

क्या है पूरा मामला

राहुल गांधी ने 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर टिप्पणी की थी। मोदी सरनेम को लेकर उन पर मानहानि का मामला दर्ज किया गया था, जिस पर सूरत कोर्ट उन्हें दोषी मानते हुए दो साल की सजा सुनाई। सजा के अगले ही दिन राहुल गांधी की संसद सदस्यता भी रद्द कर दी गई। इसके बाद सोमवार को उन्हें सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया गया। बता दें, राहुल गांधी के खिलाफ हुए फैसले पर कांग्रेस पूरे देश में विरोध प्रदर्शन कर रही है। कांग्रेसी सोमवार से काले कपड़े पहनकर विरोध जता रहे हैं। राहुल गांधी को इस मामले में विपक्षी पार्टियों का भी साथ मिला है। टीएमसी और आम आदमी पार्टी ने भी इस मसले पर भाजपा का विरोध करते हुए कांग्रेस का साथ दिया है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article