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राहुल गांधी की संसद में हुई वापसी, लोकसभा सदस्यता बहाल

Rahul Gandhi: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा में वापसी हो गई है। लोकसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर उनकी संसद सदस्यता बहाल कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता को मानहानि के मामले में बड़ी राहत दी थी। अदालत ने उनकी सजा रद्द कर दी थी, जिसके बाद उनकी सदस्यता बहाल होनी तय हो गई थी।

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राहुल गांधी की सदस्यता बहाल हुई।

Rahul Gandhi News: सोमवार की सुबह राहुल गांधी को लिए बड़ी खुशखबरी मिली। सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद राहुल गांधी की संसद सदस्यता बहाल कर दी गई है। लोकसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी करके राहुल की सदस्यता बहाल कर दी है। पिछले दो दिनों से कांग्रेस पार्टी समेत विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया के नेता लगातार ये सवाल उठा रहे थे कि राहुल की सदस्यता बहाल करने में इतनी देरी क्यों हो रही है।

राहुल की सदस्यता बहाल होने का स्वागत

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाल होने का स्वागत करते हुए सोमवार को कहा कि इससे भारत के लोगों खासकर वायनाड संसदीय क्षेत्र की जनता को राहत मिली है। खड़गे ने ट्वीट किया, 'राहुल गांधी जी की संसद की सदस्यता बहाल करने का निर्णय एक स्वागत योग्य कदम है। यह (कदम) भारत के लोगों और विशेषकर वायनाड की जनता के लिए राहत लेकर आया है।' उन्होंने कहा, 'भाजपा और मोदी सरकार के कार्यकाल का अब जो भी समय बचा है, उन्हें उसका उपयोग विपक्षी नेताओं को निशाना बनाकर लोकतंत्र को बदनाम करने की बजाय शासन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।'

विपक्षी दलों के नेताओं को खिलाई मिठाई

राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाल होने के बाद संसद भवन में खड़गे ने कांग्रेस एवं कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं को मिठाई भी खिलाई। सुप्रीम कोर्ट ने ‘मोदी उपनाम’ को लेकर की गई टिप्पणी के संबंध में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगाए जाने के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की लोकसभा सदस्यता सोमवार को बहाल कर दी गई। इस संबंध में लोकसभा सचिवालय ने एक अधिसूचना जारी की।

राहुल गांधी की संसद में हुई वापसी

लोकसभा में राहुल गांधी बतौर सांसद वापसी करते नजर आएंगे। मानहानि के मुकदमे में उन्हें गुजरात के सूरत की एक अदालत ने दो साल की सजा सुनाई थी। अहमदाबाद हाईकोर्ट ने राहुल की अपील को खारिज करते हुए उनकी सजा बरकरार रखने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए राहुल को राहत देते हुए उनकी सजा पर रोक लगा दिया।

विपक्षी पार्टियों के नेता लगातार उठा रहे थे सवाल

राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाली को लेकर विपक्षी नेता लगातार सवाल खड़े कर थे। सोमवार की सुबह लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा था कि 'हमने आदेश की कॉपी समेत सभी दस्तावेज दे दिए हैं। हम आज लोकसभा अध्यक्ष से मिलेंगे और जरूरत पड़ी तो विरोध भी करेंगे, ये हमारा अधिकार है...' वहीं ये भी माना जा रहा था कि अगर सोमवार शाम तक राहुल गांधी की सदस्यता बहाल नहीं होती तो कांग्रेस पार्टी मंगलवार, 8 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट जा सकती थी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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