देश

भारत से करीबी रिश्ते को दर्शाता है पुतिन का दिल्ली दौरा, हाल के वर्षों में चुनिंदा देशों में ही गए हैं रूसी राष्ट्रपति

भारत और रूस के रिश्ते को एक्सपर्ट एक अलग नजरिए से देख रहे हैं। रूस बॉयो फार्म के प्रेसिडेंट सत्य कुमार पुनिया ने कहा है कि हाल के वर्षों में पुतिन ने राजनीतिक रूप से बेहद करीब देशों की यात्रा की है। उनकी यह यात्रा पश्चिमी देशों को संकेत है कि रूस को अलग-थलग नहीं किया जा सकता।

Image

भारत और रूस की दोस्ती समय की कसौटी पर खरी उतरी है। तस्वीर-PTI

Photo : PTI

Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने दो दिन के दौरे पर गुरुवार शाम दिल्ली पहुंच रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक समीकरणों को देखते हुए उनकी यह काफी अहम मानी जा रही है। उनके इस दौरे पर दुनिया भर की नजरें लगी हुई हैं। पुतिन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट जारी है। बावजूद इसके हाल के वर्षों में उन्होंने कुछ चुनिंदा देशों की यात्राएं की हैं। अब उसमें भारत भी शामिल हो गया है। पुतिन की यह यात्रा भारत-रूस के उस करीबी संबंधों एवं अटूट रिश्ते को बताता और दर्शाता है जो कि दशकों के भरोसे एवं आपसी विश्वास के बाद पैदा हुआ है। दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक भागीदारी भी आपसी रिश्ते को नई ऊंचाई पर ले जा रही है।

यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन ने की चुनिंदा देशों की यात्राएं

भारत और रूस के रिश्ते को एक्सपर्ट एक अलग नजरिए से देख रहे हैं। रूस बॉयो फार्म के प्रेसिडेंट सत्य कुमार पुनिया ने कहा है कि हाल के वर्षों में पुतिन ने राजनीतिक रूप से बेहद करीब देशों की यात्रा की है। उनकी यह यात्रा पश्चिमी देशों को संकेत है कि रूस को अलग-थलग नहीं किया जा सकता। तो वहीं, पुतिन की इस यात्रा की अहमियत को रेखांकित करते हुए तातरस्तान इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट एजेंसी की तालिया मिनुलिना ने कहा कि 'विकास के लिए क्षेत्रीय सहयोग जरूरी है।' सेंटर फॉर रशियन एवं सेंट्रल एशियन स्टडीज के प्रोफेसर अमिताभ सिंह ने कहा, 'भारत और रूस के संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। दुनिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए पुतिन की यह भारत यात्रा काफी अहम है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद दबाव बढ़ने पर भी भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया।'

रूस ने भारत को एक भरोसेमंद साझेदार माना

ये संबंध केवल कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दशकों से चले आ रहे आपसी विश्वास, रणनीतिक सहयोग और सांस्कृतिक जुड़ाव की मजबूत नींव पर टिके हुए हैं। शीत युद्ध के दौर से लेकर आज के बहुध्रुवीय वैश्विक परिदृश्य तक, दोनों देशों ने एक-दूसरे के साथ गहरे और स्थायी संबंध बनाए रखे हैं। भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद से ही रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) ने भारत को एक भरोसेमंद साझेदार माना। 1971 की भारत–सोवियत मैत्री संधि दोनों देशों की रणनीतिक समझ का महत्वपूर्ण उदाहरण थी। इस संधि ने भारत को वैश्विक मंच पर आवश्यक राजनीतिक समर्थन प्रदान किया और रक्षा सहयोग को नई दिशा दी। आज भी रूस भारत का सबसे बड़ा और सबसे पुराना रक्षा साझेदार है। कई दशकों से भारत की सैन्य तकनीक और उपकरणों में रूस का योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहा है—फाइटर जेट से लेकर युद्धक टैंक, पनडुब्बियों से लेकर मिसाइल प्रणालियों तक, रूसी तकनीक भारत की सुरक्षा संरचना की रीढ़ कहलाती है।

रक्षा उत्पादन में सह-भागीदार भी है रूस

हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच सहयोग और व्यापक हुआ है। एस-400 मिसाइल प्रणाली, ब्राह्मोस क्रूज़ मिसाइल जैसे संयुक्त परियोजनाएं इस गहरे रक्षा सहयोग का उदाहरण हैं। भारत के लिए रूस केवल एक आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि रक्षा उत्पादन में सह-भागीदार भी है। दोनों देश अंतरिक्ष क्षेत्र में भी लंबे समय से एक साथ काम कर रहे हैं। 1984 में राकेश शर्मा का सोवियत अंतरिक्ष यान के साथ अंतरिक्ष जाना इस सहयोग की ऐतिहासिक उपलब्धि थी। गगनयान मिशन में भी रूसी तकनीकी सहायता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

भारत–रूस साझेदारी की मजबूत प्रमुख स्तंभ ऊर्जा क्षेत्र

ऊर्जा क्षेत्र भी भारत–रूस साझेदारी की मजबूती का एक प्रमुख स्तंभ है। रूस की विशाल ऊर्जा क्षमता भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक रही है। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में कुडनकुलम परियोजना इसका स्पष्ट उदाहरण है, जहाँ दोनों देश मिलकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर रहे हैं। इसके अलावा, रूस द्वारा रियायती दरों पर तेल आपूर्ति ने वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत को बड़ी आर्थिक राहत दी है। आर्थिक और व्यापारिक स्तर पर भी दोनों देशों का सहयोग निरंतर बढ़ रहा है। दोनों देश ‘नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ जैसे प्रोजेक्ट्स के माध्यम से कनेक्टिविटी और व्यापार को नई दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं। फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य उत्पाद, धातु, रसायन और तकनीकी क्षेत्रों में भी व्यापार बढ़ रहा है।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

और पढ़ें
End of Article