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क्या Punjab की जेलें कम पड़ गई हैं...अमृतपाल के गुर्गों को असम क्यों भेज रही AAP सरकार?

  • Written by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Mar 21, 2023, 02:05 PM IST

Amritpal Singh latest news in Punjab: पंजाब पुलिस ने अमृतपाल के करीबी सहयोगियों को गिरफ्तार करके असम के डिब्रूगढ़ स्थित जेल में शिफ्ट किया है। पंजाब सरकार के इस कदम को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

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पजाब पुलिस ने अमृतपाल के खास गुर्गों को गिरफ्तार कर असम के डिब्रूगढ़ जेल में शिफ्ट किया है।

Photo : PTI

Amritpal Singh News: वारिस पंजाब दे के मुखिया और खालिस्तानी नेता अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी के लिए पंजाब पुलिस बीते तीन दिनों से छापेमारी कर रही है। पुलिस ने अब तक उसके 114 गुर्गों को गिरफ्तार किया है, जिसमें अमृतपाल के चाचा और ड्राइवर हरप्रीत सिंह समेत चार शीर्ष नेता शामिल हैं। खास बात यह है कि पंजाब पुलिस ने शीर्ष नेताओं को पंजाब की जेलों में न रखकर भाजपा शासित राज्य असम की डिब्रूगढ़ जेल में शिफ्ट किया है।

पंजाब पुलिस के इस कदम के बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि आखिर ऐसी कौन सी वजह थी की अमृतपाल के गुर्गों को पंजाब पुलिस अपनी जेलों में रखने से डर रही है और असम की जेलों पर इतना भरोसा क्यों जताया जा रहा है? वह भी तब जब भाजपा और आम आदमी पार्टी की सरकार के बीच खींचतान जगजाहिर है। ऐसे में आइए समझते हैं, पंजाब पुलिस और गृह मंत्रालय की पूरी रणनीति...

अमित शाह और मान की बैठक में तैयार हुआ था प्लान

अजनाला में हुई घटना के बाद एक बात तो साफ हो गई थी कि अमृतपाल अब गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आ गया था। बात बीते दो मार्च की है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को दिल्ली बुलाया। दोनों के बीच हुई इसी मुलाकात को अमृतपाल के खिलाफ बड़े एक्शन की नींव बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि बैठक में अमित शाह ने एक्शन की रूपरेखा तैयार की और उनका इशारा मिलते ही खुफिया एजेंसिया भी अपने काम में जुट गईं। कहा जा रहा है कि शाह ने भगवंत मान को इस बात का आश्वासन दिया कि उनके हर एक्शन के पीछे गृह मंत्रालय दृढ़ता से खड़ा है।

फिर आई एक्शन की बारी

गृह मंत्रालय का इशारा मिलते ही पंजाब पुलिस ने अमृतपाल के खिलाफ एक्शन की शुरुआत कर दी। पंजाब में उसकी गिरफ्तारी के लिए उसके काफिले को रोका गया। हालांकि, अमृतपाल पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहा और भाग निकला। इसके बाद पुलिस ने अमृतपाल के गुर्गों की गिरफ्तारी शुरू की और बीते दिनों से जारी कार्रवाई के तहत अब तक 114 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसमें वारिस पंजाब दे के कई शीर्ष नेता भी शामिल हैं।

अमृतपाल के चाचा समेत शीर्ष नेताओं को भेजा गया असम

बड़े स्तर पर हुई गिरफ्तारी के बाद पंजाब पुलिस ने अमृपाल के चाचा हरप्रीत को असम की डिब्रूगढ़ जेल में शिफ्ट कर दिया। हरप्रीत के अलावा उसके चार खास गुर्गों को भी डिब्रूगढ़ जेल भेजा गया। पंजाब पुलिस के इसी कदम पर कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे हैं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि ऐसा सुरक्षा के लिहाज से किया गया।

पंजाब में सता रहा था विद्रोह का डर

पंजाब पुलिस के इस कदम के पीछे सबसे बड़ा जो डर है, वह है पंजाब में विद्रोह। दरअसल, 'वारिस पंजाब दे' का मुखिया बनने के बाद अमृतपाल युवाओं का चहेता बन गया। बड़े स्तर पर युवा उसके संगठन में शामिल हुए। दूसरी तरफ पंजाब में पहले से खालिस्तानी ताकतें सक्रिय थीं। ऐसे में पुलिस को सबसे बड़ा डर यह था कि अगर बड़े नेताओं को पंजाब की जेलों में रखा जाता है तो अजनाला जैसा कांड दोबारा हो सकता है और खालिस्तानी ताकतें राज्य की सुरक्षा और शांति के लिए चुनौती बन सकती हैं।

असम ही सबसे सुरक्षित क्यों

असम भाजपा शासित राज्य है और यहां पर खालिस्तन समर्थकों और सिख समुदाय का प्रभाव कम है। ऐसे में गृह मंत्रालय और पंजाब पुलिस को खालिस्तानी नेताओं को हिरासत में रखने के लिए सबसे मुफीद जगह असम ही लगी। दूसरी तरफ, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की वजह से यह राज्य भाजपा के मजबूत गढ़ों में से एक बनकर उभरा है। भाजपा सरकार की ओर से जब भी किसी राज्य में सरकार गिराने की कवायद हुई, विधायकों को असम में ही रखा गया। महाराष्ट्र राजनीतिक संकट इसका ताजा उदाहरण है, जब शिवसेना के बागी नेताओं को गुवाहाटी के एक होटल में ठहराया गया था।
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