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पंजाब के किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने तोड़ा आमरण अनशन; जानिए अपने फैसले पर क्या बोले

पंजाब के किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने अपना आमरण अनशन समाप्त किया। एक दिन पहले ही देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डल्लेवाल से आमरण अनशन खत्म करने की अपील की थी। उन्होंने ‘किसान महापंचायत’ में अपने इस फैसले की घोषणा करते हुए क्या कुछ कहा, रिपोर्ट में पढ़िए।

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किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल

Jagjit Singh Dallewal Ends his Hunger Strike: पंजाब के किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने रविवार को अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया। डल्लेवाल ने फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी सहित आंदोलनकारी किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर पिछले साल 26 नवंबर को अनशन शुरू किया था।

किसान नेता डल्लेवाल ने खत्म किया अपना आमरण अनशन

डल्लेवाल ने पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के सरहिंद में आयोजित ‘किसान महापंचायत’ में घोषणा की कि वह अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर रहे हैं। डल्लेवाल ने ‘महापंचायत’ में मौजूद किसानों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘आप (किसानों) सभी ने मुझसे आमरण अनशन खत्म करने को कहा है। आंदोलन को बनाए रखने के लिए मैं आपका ऋणी हूं। मैं आपकी भावनाओं का सम्मान करता हूं। मैं आपके आदेश को स्वीकार करता हूं।’’

पिछले साल 26 नवंबर को शुरू किया था आमरण अनशन

डल्लेवाल संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) के संयुक्त मंच के वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने किसानों की मांगों को स्वीकार करने के लिए केंद्र पर दबाव बनाने के लिए पिछले साल 26 नवंबर को आमरण अनशन शुरू किया था।

शिवराज सिंह चौहान ने डल्लेवाल से एक दिन पहले की थी ये अपील

जनवरी में केंद्र द्वारा किसान नेताओं को बातचीत के लिए आमंत्रित किए जाने के बाद, किसान नेता डल्लेवाल ने खनौरी विरोध स्थल पर चिकित्सा सहायता लेने पर सहमति जताई थी, लेकिन अपना अनशन समाप्त नहीं किया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को डल्लेवाल से अनशन समाप्त करने की अपील की थी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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