चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा ने मंगलवार को केंद्र सरकार की E20 फ्यूल पॉलिसी के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव में चिंता जताई गई है कि इस नीति के कारण ऐसे वाहन, जो E20 ईंधन के अनुरूप नहीं हैं, उन्हें नुकसान पहुंच सकता है। इसके साथ ही केंद्र सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है।
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने यह प्रस्ताव सदन में पेश किया। प्रस्ताव रखते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार ने E20 नीति को वर्ष 2030 तक लागू करने का लक्ष्य तय किया था, लेकिन इसे 2026 में ही लागू करने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? इस दौरान चीमा ने आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार ने दुनिया के सबसे बड़े एथेनॉल उत्पादक देशों में शामिल अमेरिका के दबाव में आकर इस नीति को समय से पहले लागू किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले इसके प्रभावों का व्यापक अध्ययन करना चाहिए था।
'विशेषज्ञों की राय के बिना लोगों पर थोपी गई नीति'
इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि E20 ईंधन को विशेषज्ञों की सिफारिश के बिना ही देश के लोगों पर थोप दिया गया है। मुख्यमंत्री मान ने दावा किया कि E20 ईंधन के इस्तेमाल को लेकर कोई व्यापक विशेषज्ञ अध्ययन सामने नहीं आया है, जबकि कई वाहन मालिकों को इससे इंजन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इस नीति को 2030 में लागू किया जाना था तो इसे चार साल पहले लागू करने की क्या आवश्यकता थी।
वाहन मालिकों को मिले विकल्प
इसके साथ ही मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मांग की कि वाहन मालिकों को E20 मिश्रित ईंधन और शुद्ध पेट्रोल में से अपनी सुविधा के अनुसार विकल्प चुनने का अधिकार दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक सभी वाहन E20 के अनुरूप नहीं हो जाते, तब तक लोगों पर इसे अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया जाना चाहिए।
