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पुणे पोर्श हादसा: आरोपी किशोर की मां जेल से बाहर आई, सुप्रीम कोर्ट से मिली थी अंतरिम जमानत

पिछले साल 19 मई की सुबह पुणे के कल्याणी नगर में नशे की हालत में 17 वर्षीय लड़के ने पोर्श कार से दो पहिया वाहन पर सवार दो आईटी पेशेवरों को टक्कर मार दी थी जिसमें उनकी मौत हो गई थी।

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पुणे पोर्श हादसा

Photo : PTI

Pune Porsche crash: पुणे पोर्श दुर्घटना में शामिल 17 वर्षीय लड़के की मां सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम जमानत दिए जाने के चार दिन बाद शनिवार को जेल से बाहर आ गई। इस हादसे में दो लोगों की जान चली गई थी। रक्त नमूना-स्वैपिंग मामले में गिरफ्तार 10 आरोपियों में से वह जमानत पर रिहा होने वाली पहली महिला है। हिरासत में लिए गए अन्य लोगों में किशोर का पिता, ससून अस्पताल के डॉक्टर अजय टावरे और श्रीहरि हलनोर, अस्पताल के कर्मचारी अतुल घाटकांबले, दो बिचौलिए और तीन अन्य शामिल हैं।

17 साल के लड़के ने दो लोगों को कुचला

पिछले साल 19 मई की सुबह पुणे के कल्याणी नगर में नशे की हालत में 17 वर्षीय लड़के ने पोर्श कार से दो पहिया वाहन पर सवार दो आईटी पेशेवरों को टक्कर मार दी थी। लड़के की मां पर दुर्घटना के समय अपने बेटे के नशे में होने की बात छिपाने के लिए अपने रक्त के नमूने की अदला-बदली करने का आरोप है। मां को अंतरिम जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पुणे की एक अदालत को जमानत की शर्तें तय करने का निर्देश दिया था। इसके अनुसार, जिला एवं सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।

वकील ने कई शर्तें मांगीं

विशेष सरकारी वकील शिशिर हिरे ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया, जबकि अधिवक्ता अंगद गिल और ध्वनि शाह महिला की ओर से पेश हुए। वकील हिरे ने कहा, हमने पुणे जिले में रहने पर रोक लगाने, पासपोर्ट जब्त करने, अनिवार्य रूप से पुलिस स्टेशन में उपस्थित होने और हर समय अपना मोबाइल लोकेशन चालू रखने जैसी शर्तें मांगी थीं।

हालांकि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमोल शिंदे ने अभियोजन पक्ष की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसे पुणे में रहने से रोकने की बात कही गई थी, लेकिन अन्य शर्तें स्वीकार कर लीं। बचाव पक्ष के वकीलों ने उसके पति की हिरासत और कानूनी कार्यवाही में सहायता के लिए शहर में उसकी उपस्थिति की जरूरत का हवाला देते हुए पुणे से बाहर रहने की शर्त का विरोध किया। उन्होंने प्रस्तावित 5 लाख रुपये की जमानत और रोजाना पुलिस स्टेशन जाने पर भी आपत्ति जताई।

अदालत ने जमानत लगाईं

बचाव पक्ष के वकील ने कहा, हमने तर्क दिया कि चूंकि आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और उससे कोई वसूली लंबित नहीं है, इसलिए ऐसी सख्त शर्तें अनुचित हैं। अदालत ने दलीलों को स्वीकार कर लिया और मानक जमानत शर्तें लगाईं, जिसमें 1 लाख रुपये का निजी मुचलका, जांच अधिकारी को अपना पासपोर्ट जमा करना, अनिवार्य मोबाइल टावर लोकेशन शेयरिंग और अदालत की अनुमति के बिना भारत छोड़ने पर प्रतिबंध शामिल है। अदालत ने महिला को तीन महीने तक अपनी पहचान उजागर करने से भी रोक दिया है और उसे हर बुधवार को पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने को कहा है।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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