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संभल में शाही जामा मस्जिद के सामने बन रही पुलिस चौकी, जानें आखिर क्या है प्लान

Sambhal News: संभल में 24 नवंबर को हुई हिंसा के बाद पुलिस प्रशासन ने कड़े कदम उठाते हुए कोट पूर्वी मोहल्ले में स्थित शाही जामा मस्जिद के सामने नयी चौकी बनाने का फैसला लिया है, जिसके तहत जमीन की नपाई काम काम शुरू हो गया है। अपर पुलिस अधीक्षक श्रीश चंद्र ने यह जानकारी दी। हालांकि चौकी का नाम क्या होगा इसे लेकर उन्होंने अभी कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।

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संभल में जामा मस्जिद के पास पुलिस चौकी बनाई जा रही है।

Sambhal Jama Masjid: उत्तर प्रदेश के संभल स्थित जामा मस्जिद के पास पुलिस चौकी बनाई जा रही है। इसके लिए पुलिस विभाग ने शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के बाद जामा मस्जिद के निकट खाली पड़े मैदान में पैमाइश कर चूने से मार्किंग की। संभल के एएसपी श्रीश चन्द्र ने बताया कि आसपास के इलाके को देखते हुए यहां पर एक स्थायी पुलिस चौकी बन रही है। जिससे पुलिस बल आसानी से रह सके और यहां सुरक्षा व्यवस्था में कार्य कर सके। इस परिसर की संवेदनशीलता और सुरक्षा को देखते हुए यहां पर एक पुलिस चौकी जरूरी थी। इसी कारण चौकी का निर्माण किया जाएगा।

शाही जामा मस्जिद के पास पुलिस चौकी का निर्माण

इसके पहले जब पुलिस फोर्स मस्जिद के बाहर पहुंची तो मस्जिद कमेटी और आसपास के लोग अपनी जमीनों के कागजात लेकर उनके पास पहुंचे। पुलिस ने बताया कि कागजात की जांच की जाएगी। पुलिस टीम ने उस जगह की नाप की है, जहां चौकी का निर्माण किया जाना है। जिस जगह पर चौकी का निर्माण किया जाएगा, उस जगह को चूना डालकर चिह्नित किया गया है।

संभल में 24 नवंबर को हिंसा हुई थी। इसके बाद से यहां पर पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। हिंसा के बाद पुलिस प्रशासन एहतियाती कदम उठा रहा है। संभल में तमाम पुलिस फोर्स तैनात की गई है। इसके अलावा धर्मगुरुओं के साथ भी संवाद किया गया है। बता दें कि संभल के कई इलाकों में खुदाई की जा रही है। इस दौरान धार्मिक मान्यताओं से जुड़े कई प्रतीक चिन्ह और अवशेष मिले हैं।

मस्जिद के पास 24 घंटे तैनात रहेगी पुलिस

संभल में सुरक्षा की दृष्टि से नयी पुलिस चौकी का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जहां 24 घंटे पुलिस तैनात रहेगी। दूसरी तरफ फिरोजपुर गांव स्थित फिरोजपुर किले के बाहर किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाने का काम ग्रामीणों ने खुद ही शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने फिरोजपुर किले के प्रवेश द्वार पर किए गए अवैध निर्माण को हटा दिया है।

इससे पहले प्रशासन ने पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के साथ फिरोजपुर किले के अंदर का सर्वेक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान गेट पर मौजूद अवैध निर्माण हटाने को लेकर चेतावनी भी दी थी। इसके बाद स्थानीय लोगों ने खुद ही अवैध अतिक्रमण हटा लिया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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