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'सदन में जाति पर बवाल....' अनुराग ठाकुर के समर्थन में उतरे पीएम मोदी, लोकसभा में दिए भाषण की कर दी तारीफ

Anurag Thakur Lok Sabha Speech: एक दिन पहले सदन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कमल को हिंसा से जोड़ दिया था, जिस पर अनुराग ठाकुर ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, एक नेता ने खड़े होकर कमल पर कटाक्ष किया, लेकिन कमल का नाम तो राजीव भी है, तो क्या वो राजीव गांधी को भी बुरा मानते हैं।

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Anurag Thakur

Anurag Thakur Lok Sabha Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा संसद में दिए भाषण की तारीफ की है। प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर कहा कि यह भाषण मेरे युवा और ऊर्जावान सहयोगी अनुराग ठाकुर का है। जिसे अवश्य सुनना चाहिए। यह तथ्यों से समाहित है। यह इंडी गठबंधन की गंदी राजनीति को उजागर करता है।

दरअसल, एक दिन पहले सदन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कमल को हिंसा से जोड़ दिया था, जिस पर अनुराग ठाकुर ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, एक नेता ने खड़े होकर कमल पर कटाक्ष किया, लेकिन कमल का नाम तो राजीव भी है, तो क्या वो राजीव गांधी को भी बुरा मानते हैं। अनुराग ने ऐसा कहकर राहुल के पिता स्वर्गीय राजीव गांधी की ओर से इशारा किया। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता है कि उन्हें कमल से क्या आपत्ति है। कमल का पर्यायवाची तो राजीव भी है। शायद उन्हें इस बात का पता नहीं है। अगर होता, तो मुझे पूरी उम्मीद है कि वो कमल के बारे में इस तरह की टिप्पणी ही नहीं करते।

क्या कहा था अनुराग ठाकुर ने

अनुराग ने कहा, इन्होंने कमल को हिंसा के साथ जोड़ा। इन्होंने राजीव को हिंसा के साथ जोड़ा। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि मां लक्ष्मी का आसन भी कमल है, हमारा राष्ट्रीय पुष्प भी कमल है और जिस पद्मासन मुद्रा में सिंधु सभ्यता में भगवान शिव की मूर्ति मिली थी, लोकमान्य तिलक ने भी पद्मासन मुद्रा में ही समाधि ली थी, आप कहते हैं कमल के चारों तरफ हिंसा है। आप कमल का अपमान नहीं कर रहे, आप महायोगी भगवान शिव, भगवान बुद्ध और लोकमान्य तिलक जैसे महापुरुषों का अपमान कर रहे हैं।

जाति को लेकर सदन में हुआ काफी हंगामा

बता दें, जाति आधारित गणना के मुद्दे पर, राहुल की जाति के संबंध में उनके सवाल के कारण लोकसभा में हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष ने इसे अपमान बताया और कहा कि यह उन्हें जातिवार गणना की अपनी मांग पर अड़े रहने से नहीं डिगा पाएगा। दरअसल, अनुराग ठाकुर ने अपने भाषण के दौरान कहा कि जिनकी जाति का पता नहीं वे गणना की बात करते हैं। इसके बाद अखिलेश यादव भी राहुल गांधी के समर्थन में उतर आए और उन्होंने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि सदन में कोई किसी की जाति कैसे पूछ सकता है?

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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