PM Modi Seva Sankalp Yatra: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 'सेवा संकल्प यात्रा' के तहत गुजरात के वडनगर से उत्तर प्रदेश के वाराणसी जा रहे बाइक सवार 'सेवा यात्रियों' और 'कलश यात्रियों' के साथ संवाद किया। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी के जीवन मूल्यों, समाज सुधार, अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं की पहुंच और सेवा भाव के महत्व पर विस्तार से अपनी बात रखी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस यात्रा के दौरान यात्रियों को भारत की भव्यता, विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को करीब से समझने का एक अमूल्य और अद्भुत अवसर मिल रहा है।
'किताबों से नहीं, यात्राओं से समझ में आती है भारत की भव्यता'
'सेवा यात्रियों' को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अलग-अलग प्रदेशों के गांवों में जाने से भारत की विशालता और संस्कृति का वास्तविक अनुभव होता है, जिसे केवल किताबों के माध्यम से नहीं समझा जा सकता।
अमूल्य अनुभव: पीएम ने कहा, 'लोगों के बीच जाना, उनसे जुड़ना और उनके रीति-रिवाजों, परंपराओं और बोलियों को अपनाना जीवन में एक नई ऊर्जा भर देता है। सेवा के जरिए समाज को एकजुट होते देखना एक अद्भुत अनुभव है।'
सुरक्षा की सीख (हेलमेट पहनने की सलाह): बातचीत के दौरान भगवा पगड़ी पहने यात्रियों को देखकर पीएम ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह ग्रामीणों के आदर और आतिथ्य का प्रतीक है। हालांकि, उन्होंने मजाकिया और सतर्क अंदाज में कहा, 'पगड़ी को हेलमेट समझने की भूल न करें, बाइक चलाते समय सुरक्षा के लिए हेलमेट जरूर पहनें।'
गांधी जी के विचार, वोटबैंक की राजनीति और कुंभ के सफाईकर्मियों का सम्मान
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के योगदान को याद करते हुए कहा कि वे आजादी की लड़ाई के साथ-साथ एक महान सामाजिक सुधारक भी थे।
सकारात्मक बदलाव: पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि हमें समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ निरंतर काम करते रहना चाहिए और यह काम केवल वोटबैंक की राजनीति के लिए नहीं, बल्कि समाज के स्थायी और सकारात्मक सुधार के लिए होना चाहिए।
कुंभ में सफाईकर्मियों के पैर धोने का प्रसंग: 'सेवा' के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पीएम ने प्रयागराज कुंभ का जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'प्रयागराज कुंभ में सफाई का काम करने वाले कर्मियों के कारण पूरी दुनिया में भारत की इज्जत बढ़ी थी। मेरा मन हुआ कि जिन्होंने देश का मान बढ़ाया है, मैं उनके पैर धोकर आशीर्वाद लूं। इसलिए मैंने उनके पैर धोकर उन्हें सम्मान दिया, क्योंकि सेवा करने वालों का सम्मान होना ही चाहिए।'
अंतिम व्यक्ति तक योजनाएं पहुंचना ही असली संतोष
सरकारी योजनाओं के प्रभाव पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकारें सिर्फ बजट खर्च करने के लिए योजनाएं नहीं बनातीं। जब कोई सरकारी योजना समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती है और उसके जीवन में एक नया बदलाव या सुधार लाती है, तो उससे मिलने वाला संतोष बेहद अद्भुत और असाधारण होता है। उन्होंने इस यात्रा को सेवा यात्रियों के लिए एक व्यावहारिक प्रशिक्षण करार दिया।
