PM Modi Replies To President Murmu:अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी थी, जिसका जवाब पीएम मोदी ने राष्ट्रपति को दिया इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी है, इसमें पीएम मोदी ने लिखा, 'अयोध्या धाम में अपने जीवन के सबसे अविस्मरणीय क्षणों का साक्षी बनकर लौटने के बाद मैं आपको यह पत्र लिख रहा हूं। मैं एक अयोध्या अपने मन में भी लेकर लौटा हूं, एक ऐसी अयोध्या जो कभी मुझसे दूर नहीं हो सकती।'
पीएम मोदी ने कहा, 'दो दिन पूर्व मुझे आदरणीया राष्ट्रपति जी का एक बहुत ही प्रेरणादायी पत्र मिला था, मैंने आज अपनी कृतज्ञता पत्र के माध्यम से प्रकट करने का प्रयास किया है'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे लिखा, 'अयोध्या जाने से एक दिन पूर्व मुझे आपका पत्र मिला था। आपकी शुभकामनाओं और स्नेह का मैं बहुत-बहुत आभारी हूं। आपके पत्र के हर शब्द ने आपके करुणामयी स्वभाव और प्राण-प्रतिष्ठा के आयोजन पर आपकी असीम प्रसन्नता को व्यक्त किया। जिस समय मुझे आपका पत्र मिला था, मैं एक अलग ही भावयात्रा में था। आपके पत्र ने मुझे, मेरे मन की इन भावनाओं को संभालने में, उनसे सामंजस्य बिठाने में अपार सहयोग और संबल दिया।'
प्रधानमंत्री ने लिखा, 'मैंने एक तीर्थयात्री के रूप में अयोध्या धाम की यात्रा की। जिस पवित्र भूमि पर आस्था और इतिहास का ऐसा संगम हुआ हो, वहां जाकर मेरा मन अनेक भावनाओं से विह्वल हो गया। ऐसे ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनना एक सौभाग्य भी है और एक दायित्व भी है। आपने मेरे 11 दिन के व्रत-अनुष्ठान और उससे जुड़े यम-नियमों के विषय में भी चर्चा की थी। हमारा देश ऐसे अनगिनत लोगों का साक्षी रहा है, जिन्होंने शताब्दियों तक अनेक संकल्प व्रत किए, जिससे रामलला पुनः अपने जन्मस्थान पर विराज सकें।'
इससे पहले मोदी द्वारा किए गए 11 दिवसीय कठोर अनुष्ठान का उल्लेख करते हुए मुर्मू ने कहा यह न केवल एक पवित्र अनुष्ठान है बल्कि भगवान राम के प्रति त्याग और समर्पण का एक सर्वोच्च आध्यात्मिक कार्य भी है, उन्होंने हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अयोध्या धाम में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर देश भर में जश्न का माहौल भारत की शाश्वत आत्मा की एक निर्बाध अभिव्यक्ति है।
उन्होंने आगे कहा, 'हम सभी भाग्यशाली हैं कि हम अपने राष्ट्र के पुनरुत्थान में एक नए चक्र की शुरुआत देख रहे हैं, भगवान राम के साहस, करुणा और कर्तव्य पर निरंतर ध्यान जैसे सार्वभौमिक मूल्यों को इस भव्य मंदिर के माध्यम से लोगों के और करीब लाया जाएगा।'
