PM Modi Red Fort Speech: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को अपने 13वें स्वतंत्रता दिवस संबोधन में सबसे अधिक 40 बार ’मेरे प्यारे देशवासियो’ कहकर लोगों को संबोधित किया जबकि 10 बार उन्होंने उनके लिए ’साथियो’ का जिक्र किया। उन्होंने जब नशे और अन्य व्यसनों से मुक्ति के अभियान में युवाओं को शामिल होने का आह्वान किया तब एक बार उन्हें ’मेरे प्यारे युवा’ कहकर भी संबोधित किया। अपने भाषण के दौरान मोदी ने एक-एक बार ’देश सेवक’ और ’भाई-बहनों’ का भी जिक्र किया।
पीएम मोदी का पसंदीदा संबोधन शब्द ’देशवासियो’ ही रहा
अपने कार्यकाल के दौरान स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने भाषणों के दौरान राष्ट्र को संबोधित करने के लिए मोदी का पसंदीदा संबोधन शब्द ’देशवासियो’ ही रहा है। पिछले साल उन्होंने इस शब्द का 50 बार उल्लेख किया था जबकि 2024 में लगभग 30 बार। इसी प्रकार 2023 में लगभग 15 और 2022 में 40 से अधिक बार उन्होंने इस शब्द का इस्तेमाल किया।
साल 2023 में मोदी ने देशवासियों को ’परिवारजन’ कहकर संबोधत किया था और अपने भाषण के दौरान उन्होंने तकरीबन 50 बार इसका उल्लेख किया था। हाल के वर्षों में अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषणों में उन्होंने ’साथियो’ शब्द का भी नियमित रूप से इस्तेमाल किया है।
प्रधानमंत्री ने रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने का आह्वान किया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी एवं ड्रोन प्रणाली जैसी उन्नत क्षमताओं में आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर देते हुए भारत को रक्षा विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने की वकालत की। लालकिले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने संबोधन में मोदी ने देश के सामने मौजूद बाहरी और आंतरिक सुरक्षा खतरों का जिक्र किया तथा घोषणा की कि नागरिक सुरक्षाकर्मियों का एक व्यापक नेटवर्क विकसित किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली ’सुदर्शन चक्र’ पर काम तेजी से प्रगति पर है।
मोदी ने पिछले साल 15 अगस्त को इस परियोजना की घोषणा की थी। ’सुदर्शन चक्र’ का उद्देश्य महत्वपूर्ण सैन्य और नागरिक प्रतिष्ठानों की रक्षा के लिए भारत की वायु रक्षा प्रणाली को बढ़ावा देना और दुश्मन के किसी भी खतरे का निर्णायक जवाब देना है।पाकिस्तान और चीन से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों पर चिंताओं के बीच सशस्त्र बल इस परियोजना पर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की रणनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए घरेलू रक्षा उत्पादन का विस्तार महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, ’’रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना है। दुनिया और भारत ने यह अनुभव कर लिया है कि इसके बिना कोई चारा नहीं है। विश्व जब अपनी-अपनी ही सोच रहा है, तब भारत विश्व के लिए बाजार बनकर नहीं रह सकता है। हमें रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना होगा।’’ मोदी ने कहा, ’’नयी पीढ़ी की रक्षा प्रौद्योगिकी विकसित करके हमें वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में लक्ष्य लेकर चलना है। हमें ड्रोन, तथा ड्रोन रोधी प्रणाली विकसित करनी होगी और हाइपरसोनिक रक्षा प्रौद्योगिकी में नेतृत्व करना होगा।’’
मोदी ने देश में रक्षा उत्पादन में हो रही वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनौती सीमा के भीतर हो या सरहद से बाहर, भारत हर परिस्थिति के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, ’’आज युद्ध की प्रकृति बदल रही है। अब युद्ध सीमा पर ही होता है, यह गारंटी नहीं है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि अब युद्ध के दौरान रिफाइनरी, बैंकिंग सेक्टर, डाटा सेंटर को निशाना बनाया जा रहा है और बुनियादी अवसंरचनाओं व कारखानों को नष्ट किया जा रहा है।
मोदी ने कोई समयसीमा बताए बिना कहा कि भारत का रक्षा निर्यात 50 गुना बढ़ गया है और लगभग 100 देशों को भारतीय सैन्य हार्डवेयर तथा उपकरणों की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने कहा, ’’वैश्विक पटल पर भारत की प्रतिष्ठा धीरे-धीरे बढ़ रही है। बदलते हुए समय में अस्त्र-शस्त्र की तरफ काम करना है, सैन्य बलों का सामर्थ्य बढ़ाना है।’’ पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने घरेलू रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत पहल की हैं।
