BRICS Summit 2026 का शनिवार से दिल्ली में आगाज हो रहा है। दो दिनों (12-13 सितंबर) तक चलने वाले इस कार्यक्रम के लिए करीब-करीब सभी नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार दोपहर तक दिल्ली पहुंचेंगे। वैश्विक नेताओं की मौजूदगी में भारत मंडपम में ब्रिक्स की औपचारिक शुरुआत होगी। समिट के पहले दिन और इससे इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी होगी। इन सबमें सबसे प्रमुख चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग से उनकी मुलाकात है। जिनपिंग के अलावा पीएम मोदी इथियोपिया, मलेशिया, यूएई और वियतनाम के राष्ट्राध्यक्षों के साथ भी द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे।
सुबह 10 बजे इथियोपिया के PM से मुलाकात
विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक समिट के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय मुलाकात इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली से होगी। यह द्विपक्षीय मुलाकात हैदराबाद हाउस में होनी है।
सुबह 10.30 बजे मलेशिया के पीएम के साथ बैठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम द्विपक्षीय बैठक करेंगे। यह मुलाकात भी हैदराबाद हाउस में होगी।
सुबह 11 बजे UAE के क्राउन प्रिंस से मुलाकात
सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री मोदी संयुक्त अरब अमीरात के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। यह मुलाकात भी हैदराबाद हाउस में होगी।
11.30 बजे वियतनाम के PM के साथ बैठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैदराबाद हाउस में अपने वियतनाम के समकक्ष के साथ ले मिन्ह हंग के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।
शाम 5.45 बजे चीनी राष्ट्रपति से मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय मुलाकात होगी। यह मुलाकात भारत मंडपम में होगी।
जिनपिंग के साथ खास है मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी का शनिवार का कार्यक्रम काफी व्यस्त रहने वाला है। समिट से इतर इन नेताओं से मुलाकात के अलावा वह अन्य कार्यक्रमों में भी शरीक होंगे। इन मुलाकातों में सबसे अहम जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक है। एक्सपर्ट का मानना है कि जिनपिंग के साथ सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन, वैश्विक-क्षेत्रीय एवं आपसी हित से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। जिनपिंग का यह भारत दौरा सात सालों के बाद हो रहा है, ऐसे में उनकी इस यात्रा को बेहद खास माना जा रहा है। इससे पहले अक्टूबर 2019 में चीन के राष्ट्रपति भारत की यात्रा पर आए थे। 2020 में गलवान की घटना के बाद दोनों देशों के संबंधों में काफी तनाव आ गया था लेकिन अब रिश्ते दोबारा पटरी पर आते दिखाई दे रहे हैं।
संबंधों को नई दिशा देने का अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी को चीनी राष्ट्रपति के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ता से दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने और ब्रिक्स सहयोग को नई गति प्रदान करने का अवसर मिलेगा। भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) की चीन शाखा के कार्यकारी निदेशक अतुल दलाकोटी दोनों नेताओं की द्विपक्षीय वार्ता को लेकर बहुत आशान्वित हैं। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने अपनी पिछली मुलाकातों के दौरान 'बेहतर तालमेल’का प्रदर्शन किया था और उनकी बातचीत के नतीजे आम तौर पर सकारात्मक रहे थे।
भारत ने चौथी बार संभाली BRICS की अध्यक्षता
दलाकोटी ने कहा, 'मुझे लगता है कि जब भी ये दोनों नेता मिले हैं और वे कई बार मिले हैं तो नतीजे हमेशा बहुत अच्छे रहे हैं। इसलिए, उनके बीच बेहतर आपसी तालमेल है। भारत ने इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता के लिए कड़ी मेहनत की है। और अगले साल चीन की बारी है।’ भारत ने एक जनवरी को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। दलाकोटी ने कहा कि आगे बढ़ने के लिए शांतिपूर्ण सीमा एक ’जरूरी शर्त’ है, जबकि व्यापार में बेहतर संतुलन से दोनों देशों के बीच व्यापार को मौजूदा 155 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर अगले 15 से 20 साल में 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने में मदद मिल सकती है।
अगले साल चीन संभालेगा BRICS की कमान
चीन स्थित अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान में विकासशील देशों के मामलों के अनुसंधानकर्ता वांग योमिंग ने कहा, 'चीन और भारत न केवल करीबी पड़ोसी हैं, बल्कि ब्रिक्स के संस्थापक सदस्य और उसमें अहम भूमिका निभाने वाले देश भी हैं। उनके रिश्तों की स्थिति का इस समूह के विकास पर सीधा असर पड़ता है।’दोनों देशों ने ब्रिक्स कार्यक्रमों की मेजबानी में एक-दूसरे का समर्थन करने की बात कही है। इस साल भारत के पास इसकी अध्यक्षता है और अगले साल चीन यह जिम्मेदारी संभालेगा। वांग ने चाइना डेली से कहा, 'बहुपक्षीय मंच द्विपक्षीय बातचीत के लिए अवसर पैदा कर सकते हैं, जबकि द्विपक्षीय संबंधों में सुधार से बहुपक्षीय व्यवस्थाओं के भीतर तालमेल बेहतर हो सकता है।’
