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BRICS के मंच से भारत-चीन रिश्तों को मिलेगी धार, मोदी-जिनपिंग मुलाकात क्यों अहम? सीमा पर शांति-व्यापार को मिलेगा संतुलन!

BRICS Summit 2026 : ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय मुलाकात से भारत-चीन संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के मुताबिक, शांतिपूर्ण सीमा और बेहतर व्यापार संतुलन दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने के लिए अहम हैं। साथ ही, भारत और चीन के बेहतर संबंध BRICS सहयोग को भी नई गति दे सकते हैं।

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पीएम मोदी-चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग (फाइल फोटो-PTI)

BRICS Summit 2026 PM Modi Xi Jinping Meeting : भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है और संबंधित देशों के राष्ट्राध्यक्ष भागेदारी करने के लिए पहुंचे हैं। 12 से 13 सितंबर तक चलने वाले इस आयोजन के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। मुख्य तौर चीनी राष्ट्रपति पर सभी की नजरें हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शनिवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ता से दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने और ब्रिक्स सहयोग को नई गति प्रदान करने का अवसर मिलेगा।

शी जिनपिंग शनिवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचेंगे। सात साल में भारत की यह उनकी पहली यात्रा होगी। शिखर सम्मेलन से इतर चीनी राष्ट्रपति का प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी प्रस्तावित है। भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) की चीन शाखा के कार्यकारी निदेशक अतुल दलाकोटी दोनों नेताओं की द्विपक्षीय वार्ता को लेकर बहुत आशान्वित हैं। दोनों नेताओं ने अपनी पिछली मुलाकातों के दौरान बेहतर तालमेल का प्रदर्शन किया था और उनकी बातचीत के नतीजे आम तौर पर सकारात्मक रहे थे।

दलाकोटी ने कहा कि मुझे लगता है कि जब भी ये दोनों नेता मिले हैं - और वे कई बार मिले हैं - तो नतीजे हमेशा बहुत अच्छे रहे हैं। इसलिए, उनके बीच बेहतर आपसी तालमेल है। भारत ने इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता के लिए कड़ी मेहनत की है। और अगले साल चीन की बारी है।

चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा भारत

भारत ने एक जनवरी को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। दलाकोटी ने कहा कि आगे बढ़ने के लिए शांतिपूर्ण सीमा एक ’जरूरी शर्त’ है, जबकि व्यापार में बेहतर संतुलन से दोनों देशों के बीच व्यापार को मौजूदा 155 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर अगले 15 से 20 साल में 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने में मदद मिल सकती है।

चीन स्थित अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान में विकासशील देशों के मामलों के अनुसंधानकर्ता वांग योमिंग ने कहा, ’’चीन और भारत न केवल करीबी पड़ोसी हैं, बल्कि ब्रिक्स के संस्थापक सदस्य और उसमें अहम भूमिका निभाने वाले देश भी हैं। उनके रिश्तों की स्थिति का इस समूह के विकास पर सीधा असर पड़ता है। दोनों देशों ने ब्रिक्स कार्यक्रमों की मेजबानी में एक-दूसरे का समर्थन करने की बात कही है। इस साल भारत के पास इसकी अध्यक्षता है और अगले साल चीन यह जिम्मेदारी संभालेगा। वांग ने ’चाइना डेली’ से कहा, ’’बहुपक्षीय मंच द्विपक्षीय बातचीत के लिए अवसर पैदा कर सकते हैं, जबकि द्विपक्षीय संबंधों में सुधार से बहुपक्षीय व्यवस्थाओं के भीतर तालमेल बेहतर हो सकता है।’’

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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