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कहानी G20 की: मां की हो गई मौत और बेटा करता रहा भारत मंडपम की सुरक्षा, इंस्पेक्टर सुरेश का अनुभव सुन PM Modi भी हो गए भावुक

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 24, 2023, 10:37 AM IST

G20 Summit: भारत मंडपम की सुरक्षा में तैनात दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर सुरेश कुमार ने बताया कि जब जी20 का आयोजन शुरू हुआ, उसी दौरान सुरेश कुमार की मां का निधन हो गया। हालांकि, सुरेश कुमार ने राष्ट्र की जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी और अपनी ड्यूटी को पूरा किया।

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दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर की कहानी सुन पीएम भी हो गए भावुक

Photo : Twitter

G20 Summit: जी-20 सम्मेलन के आयोजन के दौरान ड्यूटी पर तैनात रहे लोगों से जब शनिवार शाम पीएम मोदी ने संवाद किया तो कई रोचक और भावुक कहानी निकलकर सामने आईं। किसी ने देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए दूसरी भाषा सीखी तो किसी ने लेफ्ट हैंड ड्राइविंग। इतना ही नहीं एक महिला इंस्पेक्टर तो अपनी बीमार बेटी को घर पर छोड़कर ड्यूटी पर तैनात रहीं।

इन सबके बीच में एक ऐसी कहानी निकलकर सामने आई, जिसने प्रधानमंत्री मोदी को भी भावुक कर दिया। यह कहानी है भारत मंडपम की सुरक्षा में तैनात दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर सुरेश कुमार की। जब जी20 का आयोजन शुरू हुआ, उसी दौरान सुरेश कुमार की मां का निधन हो गया। हालांकि, सुरेश कुमार ने राष्ट्र की जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी और जी-20 सम्मेलन के दौरान मिली जिम्मेदारी पूरी की। बता दें, इस संवाद कार्यक्रम में हर विभाग के करीब 3000 लोगों ने भाग लिया।

मन कर रहा था मां के पास चला जाऊं पर...

इंस्पेक्टर सुरेश ने बताया कि उन्हें भारत मंडपम में सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। 9 तारीख को उन्हें सूचना मिली कि मेरी माताजी को अचानक हार्ट अटैक पड़ गया है, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने रूंधे गले से बताया कि उनका एक मन कर रहा था कि उन्हें मां के पास चले जाना चाहिए, लेकिन दूसरा मन कर रहा था कि यह कार्यक्रम देश का गौरव है और मुझे ड्यूटी पर ही रहना चाहिए।

पीएम मोदी भी हुए भावुक

इंस्पेक्टर सुरेश की कहानी सुनकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भावुक हो गए। उन्होंने सुरेश कुमार की प्रशंसा करते हुए कहा कि आपने बहुत ही कठिन समय में अपने मन को संतुलित रखा, यह बहुत हिला देने वाला पल होता है। आपने खुद को संभाला, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी थोड़े से भावुक नजर आए।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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