PIB Fact Check: भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच चल रहे MQ-9B ड्रोन अधिग्रहण सौदे को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को प्रेस सूचना ब्यूरो(PBI Fact Check) ने गलत पाया है। सोशल मीडिया पर दावा किया गया था कि इन ड्रोन की खरीद के लिए भारत सरकार अधिक कीमत चुका रही है। फैक्ट चेक में पाया गया कि ये दावे अनावश्यक हैं और उन्हें गलत उद्देश्य से प्रचारित किया जा रहा है। पीआईबी ने अपने फैक्ट चेक में कहा है कि इन दावों को उद्देश्य ड्रोन अधिग्रहण प्रक्रिया को पटरी से उतारना है।
दरअसल, टीएमसी नेता साकेत गोखले ने अपने एक ट्वीट में दावा किया था कि पीएम मोदी ने अमेरिका में 3.1 बिलियन डॉलर से अधिक कीमत पर 31 MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन खरीदने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। जबकि, प्रति ड्रोन की कीमत 110 मिलियन डॉलर है।
फैक्ट चेक में क्या सामने आया
पीआईबी के फैक्ट चेक में सामने आया है कि प्रीडेटर जोन को लेकर किया गया दावा गलत और भ्रामक है। यह अमेरिकी सरकार द्वारा तय की गई कीमत है। फैक्ट चेक में आगे कहा गया है कि कीमत और खरीद की शर्तों को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया और यह अधिग्रहण अभी बातचीत के अधीन है। आगे कहा गया है कि सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे भ्रामक हैं। इनका उद्देश्य उचित अधिग्रहण प्रक्रिया को पटरी से उतारना है।
अभी तय नहीं हुई कीमत
पीआईबी ने अपनी एक प्रेस रिलीज में कहा है कि ड्रोन की कीमत और खरीद की अन्य नियम एवं शर्तें अभी तय नहीं की गई हैं और ये बातचीत के अधीन हैं। इस संबंध में, सभी से अनुरोध है कि वे फर्जी खबरें व गलत सूचना न फैलाएं जो सशस्त्र बलों के मनोबल पर गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं और अधिग्रहण प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।
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