Patanjali Misleading Ads Case: पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन मामले में सुप्रीम कोर्ट से योग गुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को बड़ी राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि उत्पादों के बारे में भ्रामक विज्ञापन को लेकर दाखिल माफीनामे को स्वीकारते हुए उनके खिलाफ अवमानना मामले को बंद कर दिया है। इससे पहले पतंजलि ने गत 9 जुलाई को कोर्ट को बताया कि उसने अपने फ्रेंचाइजी स्टोर्स को उन 14 आयुर्वेदिक उत्पादों को हटाने के लिए कहा है जिनके लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे। रामदेव और बालकृष्ण ने बताया कि सोशल मीडिया एवं ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों पर से भी इन उत्पादों के विज्ञापन हटाने के लिए कहा गया।
कोर्ट ने 14 मई को फैसला सुरक्षित रखा
इस मामले में अदालत ने 14 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पतंजलि ने कोर्ट को बताया था कि उसने 5,606 फ्रेंचाइजी स्टोर्स से अपने इन उत्पादों को वापस लेने का निर्देश दिया था। बाद में पतंजलि ने हलफनामा दायर कर कोर्ट को बताया कि उसके आदेशों पर उसने कार्रवाई की है।
रामदेव-बालकृष्ण को कोर्ट से लगी फटकार
शीर्ष अदालत में पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन मामले की लंबे वक्त तक सुनवाई चली। हर बार पेशी में रामदेव और बालकृष्ण को व्यक्तिगत रूप से पेश होने पड़ा। दोनों ने कोर्ट से बिना शर्म माफी मांगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापनों के लिए रामदेव और बालृष्ण को जमकर फटकार भी लगाई। रामदेव से तीखे सवाल हुए। आईएमए अध्यक्ष ने इंटरव्यू में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों की आलोचना की तो पतंजलि को कोर्ट में घसीटने वाले खुद मुश्किल में पड़ गए। सुप्रीम कोर्ट ने आईएमए अध्यक्ष की खूब खिंचाई की है।
कोर्ट ने कहा-एक्शन के लिए तैयार रहें
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने भ्रामक विज्ञापन मामले की सुनवाई की। बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी और फिर भी पतंजलि के विज्ञापन छापे जा रहे थे। 21 नवंबर को कोर्ट का आदेश होने के बाद भी अगले दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। इस पर बाबा रामदेव के वकील ने कहा कि भविष्य में ऐसा नहीं होगा। पहले जो गलती हुई उसके लिए माफी मांगते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना मामले में बाबा रामदेव और पतंजलि के एमडी आचार्य बालकृष्ण की माफी को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने ये भी कहा कि एक्शन के लिए तैयार रहें।
