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सिर्फ दो दिन का विधानसभा सत्र क्यों रखा गया? सावंत सरकार पर विपक्ष हमलावर; पूछे तीखे सवाल

Opposition Slams Sawant Government: गोवा में दो दिन का विधानसभा सत्र बुलाए जाने को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवालों की बौछार कर दी। विपक्ष ने सावंत सरकार पर हमला करते हुए पूछा कि क्या ये सवालों से बचने का ‘शॉर्टकट’ है? कई विपक्षी विधायकों ने विधानसभा में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं कि किसने क्या कहा।

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विपक्ष ने गोवा सरकार को जमकर घेरा।

Goa Politics: गोवा में विपक्ष ने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत पर तीखा हमला बोलते हुए सिर्फ दो दिन का विधानसभा सत्र बुलाने को लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। नेता प्रतिपक्ष यूरी आलेमाओ ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'यह दो दिवसीय सत्र लोकतंत्र की हत्या के समान है। सरकार जवाबदेही से भाग रही है, जबकि गोवा भ्रष्टाचार और कुप्रशासन की आग में जल रहा है।'

घोटालों के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा

सावंत सरकार इस समय 'नौकरी के बदले कैश' घोटाले, ज़मीन हथियाने और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोपों से घिरी हुई है। विपक्ष का आरोप है कि इन मुद्दों पर बहस से बचने के लिए भाजपा सरकार ने विधानसभा सत्र को सिर्फ दो दिन तक सीमित कर दिया है।

विपक्ष का सवाल- सीएम को किस बात का डर?

कांग्रेस, गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) और आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों ने विधानसभा में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया और सरकार से जवाब मांगा। विपक्ष का सवाल है कि अगर सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो फिर सत्र सिर्फ दो दिन का क्यों रखा गया?

यूरी आलेमाओ ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, 'हर दिन नया घोटाला सामने आ रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री जवाब देने के बजाय भाग रहे हैं। आखिर उन्हें डर किसका है?'

GFP प्रमुख विजय सरदेसाई ने भाजपा पर विधानसभा को 'रबर स्टांप संस्था' में बदलने का आरोप लगाया और कहा, 'यह दो दिवसीय सत्र मज़ाक से कम नहीं। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि तानाशाही है!'

'सवालों से बचने का नाकाम प्रयास'

विपक्ष ने दावा किया है कि गोवा इस समय घोटालों के दलदल में फंसा हुआ है।

नौकरी घोटाला- सरकारी नौकरियों के बदले उम्मीदवारों से लाखों रुपये की रिश्वत लेने का आरोप, लेकिन नौकरियां नहीं मिलीं।

भूमि घोटाला- सरकारी जमीनें सस्ते दामों पर रियल एस्टेट माफिया को बेची जा रही हैं।

सरकार ने इन आरोपों को 'राजनीतिक हथकंडा' बताया है, हालांकि विपक्षी दलों के नेता इन मामलों को लगातार तूल दे रहे हैं और ये मसला बढ़ता जा रहा है।

विपक्ष ने सड़कों पर उतरने का किया ऐलान

विधानसभा सत्र बिना ठोस बहस के समाप्त होते ही विपक्ष ने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दे दी है। विपक्ष की मांग है कि सत्र की अवधि बढ़ाई जाए और सभी घोटालों की निष्पक्ष जांच हो। यूरी आलेमाओ ने कहा, 'लोकतंत्र कोई औपचारिकता नहीं है। अगर सरकार विधानसभा में जवाब नहीं देगी, तो हम इसे सड़कों पर लाकर छोड़ेंगे।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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