One Nation One Election : 'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर गठित उच्च स्तरीय समिति के चेयरमैन एवं पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ मंगलवार को बैठक हुई। विपक्षी दलों के नेताओं ने समिति के समक्ष 'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर अपने विचार साझा किए। टीएमसी नेता एवं सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि 'हमने वन नेशन, वन इलेक्शन के विचार का विरोध किया। हमारा मानना है कि हमारी संसदीय लोकतंत्र को बदलने के लिए यह एक हिडेन एजेंडा है। इसके जरिए भविष्य में देश को एक तानाशाही अथवा प्रेसिडेंशियल जैसा कि अमेरिका में होता है, लोकतंत्र को वैसी चुनाव व्यवस्था में बदला जा सकता है।'
येचुरी, बसु से भी मिले कोविंद
कोविंद ने माकपा नेता सीताराम येचुरी, राज्यसभा के पूर्व सांसद निलोत्पल बसु सहित राजनीतिक दलों के अन्य प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इन सभी नेताओं ने देश में एक साथ चुनाव कराने पर अपने विचार साझा किए।
कल्याण बनर्जी ने कहा, 'पहले पूरे भारत में व्यावहारिक रूप से दो राष्ट्रीय राजनीतिक दल थे। अब अनेक क्षेत्रीय दल हैं। संविधान स्वयं कहता है कि जहां तक राज्य विधायिका का सवाल है, यह जनता की इच्छा है कि वह पांच साल के लिए अपनी सरकार चुने। इसी तरह लोग पांच साल के लिए केंद्र सरकार चुनेंगे। ये दो प्रावधान संविधान की मूल संरचना हैं।'
'संवैधानिक प्रावधानों में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता'
उन्होंने कहा, 'इन संवैधानिक प्रावधानों में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता और 'एक राष्ट्र एक चुनाव' की अवधारणा पेश कर जनता की शक्ति को कम नहीं किया जा सकता।' टीएमसी के नेता ने कहा, 'मान लीजिए कि कोई राज्य सरकार गिर जाती है। ऐसा अब हर जगह हो रहा है। उस स्थिति में, क्या वह राज्य सरकार बरकरार रहेगी या शेष अवधि के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया जाएगा? उस स्थिति में लोगों की पसंद से समझौता किया जाएगा... यह विचार वास्तव में देश के संघीय ढांचे में ही हस्तक्षेप है।'
इस अवधारणा से सहमत नहीं-बनर्जी
उन्होंने कहा, 'पिछले कुछ वर्षों से विपक्षी दल कह रहे हैं कि केंद्र सरकार देश के संघीय ढांचे में हस्तक्षेप कर रही है। इसलिए, हम इस विचार का विरोध कर रहे हैं।' टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने पिछले महीने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' को लेकर उच्चस्तरीय समिति को पत्र लिखकर कहा था कि वह इस अवधारणा से सहमत नहीं हैं।
