Operation Sindoor weapons: एक साल पहले भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए पाकिस्तान को ऐसा जवाब दिया था, जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई दी। यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि भारत की नई रणनीतिक ताकत का प्रदर्शन भी था। आधुनिक मिसाइल सिस्टम, एडवांस ड्रोन, प्रिसिजन स्ट्राइक और हाई-टेक सर्विलांस ने इस ऑपरेशन को बेहद खास बना दिया था।
ऑपरेशन सिंदूर में भारत की नई सैन्य ताकत, टेक्नोलॉजी और रणनीति का प्रदर्शन किया गया। इस ऑपरेशन में कई ऐसे हथियार इस्तेमाल हुए, जिन्होंने पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम और आतंकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया। सबसे ज्यादा चर्चा भारत की मिसाइल क्षमता और स्वदेशी एयर डिफेंस नेटवर्क की हुई।
आज ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी पर सबसे ज्यादा चर्चा उन हथियारों की हो रही है, जिन्होंने पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क और सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया। सवाल यही है, आखिर भारत ने कौन-कौन से हथियार इस्तेमाल किए थे, जिन्होंने दुश्मन को बैकफुट पर ला दिया?
ब्रह्मोस: पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा डर
ब्रह्मोस मिसाइल को ऑपरेशन सिंदूर का सबसे घातक हथियार माना गया। यह सुपरसोनिक मिसाइल इतनी तेज रफ्तार से हमला करती है कि दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का समय बेहद कम मिलता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कई अहम एयरबेस और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में ब्रह्मोस का इस्तेमाल किया। पाकिस्तान के नेताओं ने बाद में माना कि भारत के हमले बेहद तेज और सटीक थे।
आकाशतीर बना भारत की 'डिजिटल ढाल'
जहां ब्रह्मोस से हमला किया जा रहा था, वहीं Akashteer सिस्टम भारतीय आसमान की सुरक्षा में लगा था। यह AI आधारित एयर डिफेंस नेटवर्क रियल टाइम डेटा के जरिए ड्रोन, मिसाइल और हवाई खतरों को ट्रैक करता है।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि पाकिस्तान की तरफ से भेजे गए कई ड्रोन और मिसाइल हमलों को भारतीय सिस्टम ने हवा में ही खत्म कर दिया। आकाशतीर को इस ऑपरेशन का गेम चेंजर भी कहा गया
SCALP और HAMMER ने की सटीक तबाही
भारत के राफेल फाइटर जेट्स ने SCALP मिसाइल और HAMMER बमों की मदद से सीमा पार मौजूद आतंकी और सैन्य ठिकानों पर प्रिसिजन स्ट्राइक की।
खास बात यह रही कि भारतीय विमान सीमा के बेहद करीब रहकर भी दुश्मन के अंदर गहरे टारगेट्स को निशाना बनाने में सफल रहे। इससे पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम पर भी दबाव बढ़ा।

आज ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी
दरअसल, पाकिस्तान ने इस दौरान चीन से मिले PL-15 मिसाइल, HQ-9P एयर डिफेंस सिस्टम और J-10 लड़ाकू विमानों पर भरोसा किया था। लेकिन भारतीय एयर डिफेंस और स्ट्राइक सिस्टम के सामने ये हथियार ज्यादा असर नहीं दिखा सके। भारतीय सेना ने बाद में पंजाब के होशियारपुर इलाके में चीन निर्मित PL-15 मिसाइल के टुकड़े भी बरामद किए थे।
चीन के हथियारों पर क्यों उठे सवाल?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हुई कि पाकिस्तान जिन चीनी हथियारों पर भरोसा कर रहा था, वे भारत के हमलों को रोकने में पूरी तरह सफल क्यों नहीं रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस नेटवर्क, स्वदेशी तकनीक और तेज फैसलों ने पाकिस्तान की रणनीति को कमजोर कर दिया। यही वजह रही कि कुछ ही दिनों में पाकिस्तान ने तनाव कम करने की बात शुरू कर दी।
स्वदेशी आकाश को तो नहीं भूले?
आकाश की मारक क्षमता 60 किलोग्राम विस्फोटक और जीरो एरर। भारतीय वायु सेना के इंटीग्रेटेड काउंटर UAS (मानवरहित हवाई प्रणाली) ग्रिड का हिस्सा, आकाश मिसाइल ने 8 मई को कई भारतीय शहरों पर पाकिस्तानी हमलों को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई। इसने पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों के खिलाफ भारतीय हवाई क्षेत्र की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
DRDO द्वारा विकसित आकाश सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल को ड्रोन और मिसाइलों जैसे हवाई खतरों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। 60 किलोग्राम विस्फोटक और एडवांस मार्गदर्शन प्रणालियों से लैस, आकाश-NG वेरिएंट ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन्स को मार गिराया।
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