Operation Milap : गुजरात पुलिस द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन मिलाप’ ने हजारों परिवारों की उम्मीदों को फिर से जिंदा कर दिया है। राज्यभर में वर्ष 2007 से लापता लोगों के मामलों की दोबारा जांच शुरू करते हुए पुलिस ने महज दो हफ्तों में 701 लोगों को खोज निकालने में सफलता हासिल की है। इनमें बच्चे, महिलाएं और पुरुष शामिल हैं, जिन्हें अब उनके परिवारों से दोबारा मिलाया जा रहा है।
24,767 से ज्यादा लोगों के लापता होने के मामले दर्ज
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व और DGP डॉ. के.एल.एन. राव के मार्गदर्शन में शुरू किए गए इस विशेष अभियान के तहत गुजरात के सभी पुलिस कमिश्नर और जिला पुलिस अधीक्षकों को पुराने गुमशुदगी मामलों की फाइलें दोबारा खोलने, तकनीकी विश्लेषण करने और परिवारों से संपर्क साधने के निर्देश दिए गए थे। गुजरात पुलिस के अनुसार, वर्ष 2007 से अब तक राज्य में 24,767 से ज्यादा लोगों के लापता होने के मामले दर्ज हुए हैं।
राज्यभर में कुल 701 लोगों को खोजा गया
नायब मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने बताया कि 7 मई से 21 मई के बीच राज्यभर में कुल 701 लोगों को खोजा गया है। इनमें 19 नाबालिग लड़के, 97 नाबालिग लड़कियां, 417 महिलाएं और 168 पुरुष शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान सिर्फ पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि परिवारों को वर्षों बाद अपने प्रियजनों से मिलाने का प्रयास है। इंसानी रिश्तों की सबसे लंबी प्रतीक्षा अक्सर किसी पुलिस फाइल में धूल खाती रह जाती है। इस बार उन फाइलों को फिर खोला गया।
वर्षों पुराने मामलों को सुलझाने की कोशिश
CID क्राइम और रेलवे महिला सेल के ADGP अजय चौधरी के मुताबिक, ऑपरेशन मिलाप डेटा एनालिसिस, डिजिटल ट्रैकिंग, टेक्निकल इंटेलिजेंस और ह्यूमन इनपुट के आधार पर चलाया जा रहा है। पुलिस सोशल मीडिया गतिविधियों, मोबाइल लोकेशन, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और पुराने रिकॉर्ड की मदद से वर्षों पुराने मामलों को सुलझाने की कोशिश कर रही है।
दस साल बाद राजकोट से खोज निकाला
अभियान के दौरान कई चौंकाने वाले मामले भी सामने आए हैं। वडोदरा जिले के पादरा की एक महिला, जो 2016 में अपने पांच साल के बेटे के साथ लापता हुई थी, उसे दस साल बाद राजकोट से खोज निकाला गया। जांच में सामने आया कि पारिवारिक विवाद के बाद महिला ने दूसरा विवाह कर लिया था और अब गरबा क्लास चलाती है। उसका बेटा अब 15 साल का हो चुका है। पुलिस ने इस अभियान के लिए 15 प्वाइंट की SOP भी तैयार की है। इसके तहत पुराने केस फाइलों की समीक्षा, सोशल मीडिया ट्रैकिंग, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, शेल्टर होम और अस्पतालों की जांच, पोस्टमॉर्टम रिकॉर्ड मिलान और मानव तस्करी से जुड़े संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है।
अपराध नेटवर्क के खिलाफ बड़ा अभियान
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों के पीछे पारिवारिक विवाद, प्रेम संबंध, आर्थिक संकट, मानसिक तनाव और मानव तस्करी जैसे कारण सामने आते हैं। यही वजह है कि ऑपरेशन मिलाप को केवल गुमशुदगी की जांच नहीं, बल्कि मानव तस्करी और अपराध नेटवर्क के खिलाफ बड़े अभियान के रूप में भी देखा जा रहा है। गुजरात पुलिस के लिए यह सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि उन परिवारों तक उम्मीद वापस पहुंचाने की कोशिश है, जिन्होंने सालों पहले अपने अपनों के लौटने की आस लगभग छोड़ दी थी। कभी-कभी सबसे लंबा सफर घर लौटने का ही होता है। मानव सभ्यता चांद तक पहुंच गई, लेकिन किसी मां को उसका बच्चा वापस दिलाने में दस साल लग जाते हैं। दुनिया सचमुच अजीब तरीके से चलती है।
