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ओडिशा में सरकार बदलते ही पांडियन पर कसा शिकंजा, अंधाधुध हेलीकॉप्टर इस्तेमाल की जांच शुरू

Odisha News: वीके पांडियन ने 2023 में ओडिशा के सभी 30 जिलों में शिकायत निवारण सुनवाई के लिए 190 स्थानों का दौरा किया था। इस अवधि के दौरान ओडिशा में 450 हेलीपैड बनाए गए थे ताकि पांडियन द्वारा उपयोग किए गए हेलीकॉप्टर आसानी से उतर सकें। इसमें करीब 3 लाख रुपये का खर्च आया था।

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वीके पांडियन के खिलाफ भाजपा सरकार ने शुरू की जांच।

Photo : Twitter

Odisha News: ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनते ही वीके पांडियन पर शिकंजा कसता जा रहा है। भाजपा सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के करीबी सहयोगी वी के पांडियन द्वारा सरकारी हेलीकॉप्टरों का कथित तौर पर व्यापक रूप से इस्तेमाल की जांच शुरू कर दी है। बता दें, लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बीजद की हार के बाद सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने वाले पांडियन पर, लोगों के दरवाजे पर शिकायत निवारण सुनवाई करने के लिए सरकारी हेलीकॉप्टरों का अंधाधुंध इस्तेमाल करने का आरोप है।

ओडिशा के वाणिज्य और परिवहन मंत्री विभूति भूषण जेना ने कहा कि राज्य सरकार 2000 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी पांडियन द्वारा हेलीकॉप्टरों के व्यापक रूप से इस्तेमाल की जांच कर रही है। उन्होंने कहा, सरकारी खजाने का दुरुपयोग होने पर किसी के भी खिलाफ निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। लोगों ने फरवरी 2020 और दिसंबर 2023 के बीच राज्य भर में पांडियन की लगातार हेलीकॉप्टर यात्रा पर सवाल उठाए हैं।

190 स्थानों का हेलीकॉप्टर से किया था दौरा

राज्य के भाजपा नेताओं द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पांडियन ने 2023 में ओडिशा के सभी 30 जिलों में शिकायत निवारण सुनवाई के लिए 190 स्थानों का दौरा किया था। पूर्ववर्ती बीजद सरकार ने दावा किया था कि सत्र के दौरान पांडियन ने 57,442 याचिकाएं एकत्र की थीं जिनमें से 43,536 मुद्दों का समाधान किया गया था। हालांकि, उसने हेलीकॉप्टर यात्रा पर खर्च की गई राशि का खुलासा नहीं किया। ओडिशा के कानून, उत्पाद शुल्क और निर्माण मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा कि इस अवधि के दौरान ओडिशा में 450 हेलीपैड बनाए गए थे ताकि पांडियन द्वारा उपयोग किए गए हेलीकॉप्टर आसानी से उतर सकें।

हेलीपैड के निर्माण में खर्च हुए थे 3 लाख रुपये

उन्होंने कहा कि प्रत्येक हेलीपैड के निर्माण के लिए लगभग 3 लाख रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। हरिचंदन ने कहा, हेलीपैड के निर्माण की अनुमति किसने दी और खर्च किस मद से किया गया, इसकी ठीक से जांच की जाएगी। अवैध निर्माण में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, पांडियन के हेलीकॉप्टर इस्तेमाल का बचाव करते हुए बीजद नेता संबित राउत्रे ने कहा कि वह मुख्यमंत्री की ओर से जन सुनवाई के लिए राज्य में विभिन्न स्थानों का दौरा कर रहे थे। उन्होंने कहा, राज्य में सत्ता में आने के बाद से भाजपा बिना किसी मुद्दे के, शोर मचा रही है। कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्य सचिव बिजय पटनायक ने भी पांडियन के हेलीकॉप्टर इस्तेमाल की गहन जांच की मांग की है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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