बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने रविवार को राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद पर बाबा साहब आंबेडकर का कथित तौर पर अनादर करने का आरोप लगाया। लालू ने दलितों के प्रतीक आंबेडकर का चित्र कथित तौर पर अपने पैर के पास रखवाया था। जदयू महासचिव श्याम रजक ने प्रेसवार्ता में अपने पूर्व बॉस (लालू प्रसाद) के खिलाफ भड़ास निकाली। रजक पिछले साल राजद छोड़कर नीतीश के नेतृत्व वाली पार्टी में वापस आए थे।
राजद और जदयू की सरकारों में मंत्री पद संभाल चुके रजक ने यह भी दावा किया, 'नीतीश कुमार का 20 साल का कार्यकाल सामान्य रूप से सभी वंचित वर्गों और विशेष रूप से दलितों के उत्थान के लिए समर्पित रहा है। उनकी नीतियों का असर जमीनी स्तर पर महसूस किया जा रहा है।'
जदयू नेता एक समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे, जहां फुलवारी के कई लोगों को पार्टी में शामिल किया गया।रजक कई बार फुलवारी का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, लेकिन 2020 में राजद ने उन्हें टिकट नहीं दिया था और यह सीट गठबंधन सहयोगी भाकपा (माले) को दे दी गयी थी।मुख्यमंत्री के कट्टर प्रतिद्वंद्वी प्रसाद के खिलाफ जदयू महासचिव का तीखा बयान भाजपा द्वारा राजद अध्यक्ष के खिलाफ की गई तीखी टिप्पणी के एक दिन बाद आया है।
हालांकि, राजद प्रवक्ता शक्ति यादव ने विवाद के लिए 'कैमरे के कोण' को जिम्मेदार ठहराया है और दावा किया है कि जो व्यक्ति प्रसाद के घर आंबेडकर की तस्वीर लेकर आया था उसने 'तब तस्वीर अपने हाथों में ही पकड़ रखी थी' यादव ने इस बात पर भी जोर दिया है कि प्रसाद कई बीमारियों से ग्रस्त हैं, इसलिए वह ‘चिकित्सों की सलाह के अनुसार’ अपने पैर सोफे पर रखे थे।
इस बीच, आगामी विधानसभा चुनाव में राजद को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानने वाली भाजपा ने प्रसाद पर अपना हमला तेज कर दिया है। एक बयान में, प्रदेश भाजपा ने घोषणा की है कि उसका 'अनुसूचित जाति मोर्चा' शाम को राजद सुप्रीमो का पुतला फूंकेगा।
