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Rahul Gandhi : नोएडा के मजदूरों को मिला राहुल गांधी का साथ, कांग्रेस नेता बोले-'देश के श्रमिकों की यह आखिरी चीख'

Rahul Gandhi: उत्तर प्रदेश के नोएडा में विभिन्न मांगों को लेकर श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शनों के बाद राज्य सरकार ने सभी श्रेणियों के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी बढ़ा दी है और संशोधित दरें एक अप्रैल से प्रभावी मानी जाएंगी।

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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी।

Photo : PTI

Noida Workers Protest: श्रमिकों का वेतन बढ़ाने को लेकर हुए प्रदर्शन पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) मंगलवार को प्रतिक्रिया दी। राहुल ने कहा कि 'कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आखिरी चीख थी जिसकी हर आवाज को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया। मैं हर उस मजदूर के साथ हूं - जो इस देश की रीढ़ है और जिसे इस सरकार ने बोझ समझ लिया है।' श्रमिकों के प्रदर्शन का आज पांचवां दिन है। इस प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने जगह-जगह सुरक्षा कड़ी कर दी है। फिर भी प्रदर्शन की छुटपुट घटनाएं की सूचना आ रही है।

सभी श्रेणियों के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी बढ़ी

उत्तर प्रदेश के नोएडा में विभिन्न मांगों को लेकर श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शनों के बाद राज्य सरकार ने सभी श्रेणियों के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी बढ़ा दी है और संशोधित दरें एक अप्रैल से प्रभावी मानी जाएंगी। गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने कहा, 'मजदूरी में उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने वृद्धि की है।... इस फैसले को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कल देर रात मंजूरी दे दी।’एक आधिकारिक बयान के अनुसार, गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों को अब 11,313 रुपये प्रति माह के बजाय 13,690 रुपये प्रति माह मिलेंगे, जबकि अर्ध-कुशल श्रमिकों को 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16,868 रुपये न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी।

नियोक्ता-श्रमिक संगठनों के साथ हुई चर्चा

अन्य नगर निगम क्षेत्रों में संशोधित मासिक वेतन अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों के लिए 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये तय किया गया है। शेष जिलों में अकुशल श्रमिकों को 12,356 रुपये प्रतिमाह, अर्धकुशल श्रमिकों को 13,591 रुपये और कुशल श्रमिकों को 15,224 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। यह फैसला नियोक्ता संगठनों और श्रमिक संगठनों के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया।

जिले के कुछ हिस्सों में प्रदर्शन हिंसक हो गए

यह कदम सोमवार को नोएडा में फैक्टरी श्रमिकों द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में उठाया गया है। सोमवार को हजारों श्रमिकों ने अधिक वेतन और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। जिले के कुछ हिस्सों में प्रदर्शन हिंसक हो गए थे, जिसके बाद सरकार ने स्थिति से निपटने तथा श्रमिकों और नियोक्ताओं के साथ बातचीत के लिए एक समिति गठित की थीा। बयान के अनुसार, समिति बातचीत और समन्वय के माध्यम से औद्योगिक असहमति को हल करने की दिशा में काम कर रही है तथा श्रमिकों की चिंताओं को दूर करने के लिए आगे उठाए जाने वाले कदमों पर भी विचार कर रही है।

Noida workers

Noida workers

'यही है 'विकसित भारत' का सच'

X पर अपने ट्वीट में राहुल गांधी ने कहा कि 'नोएडा में काम करने वाले एक मज़दूर की ₹12,000 महीने की तनख्वाह,₹4,000-7,000 किराया। जब तक ₹300 की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक ₹500 सालाना किराया बढ़ा देता है। तनख्वाह बढ़ने तक ये बेलगाम महंगाई जिंदगी का गला घोंट देती है, कर्ज की गहराई में डुबा देती है - यही है 'विकसित भारत' का सच। एक महिला मज़दूर ने कहा - 'गैस के दाम बढ़ते हैं, पर हमारी तनख्वाह नहीं।' इन लोगों ने शायद इस गैस संकट के दौरान अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए ₹5000 का भी सिलेंडर खरीदा होगा। यह सिर्फ नोएडा की बात नहीं है और यह सिर्फ भारत की भी बात नहीं है। दुनियाभर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं - पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूट गई है।

टैरिफ वॉर का असर उद्योगपतियों पर नहीं-राहुल

राहुल ने कहा कि 'मगर, अमेरिका के टैरिफ वॉर, वैश्विक महंगाई, टूटती सप्लाई चेन-इसका बोझ मोदी जी के 'मित्र' उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा। इसकी सबसे बड़ी मार पड़ी है उस मजदूर पर जो दिहाड़ी कमाता है, तभी रोज खाता है। वो मजदूर, जो किसी युद्ध का हिस्सा नहीं, जिसने कोई नीति नहीं बनाई - जिसने बस काम किया। चुपचाप। बिना शिकायत। और उसके बदले अपना हक मांगने पर उन्हें मिलता क्या है? दबाव और अत्याचार। एक और जरूरी मुद्दा - मोदी सरकार ने 4 लेबर कोड जल्दबाजी में बिना संवाद नवंबर, 2025 से लागू कर, काम का समय 12 घंटे तक बढ़ा दिया।'

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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