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'केंद्रीय करों में हिस्सेदारी में से किसी राज्य का हिस्सा नहीं घटाया...' बजट चर्चा में वित्त मंत्री ने किया साफ

वित्त मंत्री ने कहा, 'हम पर आरोप लगता है कि हम राज्यों की 41 प्रतिशत कर हिस्सेदारी का हस्तांतरण नहीं करते। मैं सदन के माध्यम से आश्वासन देती हूं कि हमने केंद्रीय करों में राज्यों को मिलने वाली हिस्सेदारी में से किसी राज्य का हिस्सा नहीं घटाया है।'

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यों को केंद्र से उनकी कर हिस्सेदारी का हस्तांतरण नहीं होने संबंधी कुछ विपक्षी सांसदों के आरोपों को खारिज करते हुए बुधवार को कहा कि सरकार ने केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में से किसी राज्य का हिस्सा नहीं घटाया है। सीतारमण ने लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि सरकार ने बजट में पांच मेडिकल क्लस्टर, पांच मेगा औद्योगिक पार्क, बुजुर्गों के देखभाल के लिए पेशेवरों को तैयार करने जैसी कई घोषणाएं की हैं जिनसे लाखों रोजगारों का सृजन होगा।

उन्होंने कहा, 'हम पर आरोप लगता है कि हम राज्यों की 41 प्रतिशत कर हिस्सेदारी का हस्तांतरण नहीं करते। मैं सदन के माध्यम से आश्वासन देती हूं कि हमने केंद्रीय करों में राज्यों को मिलने वाली हिस्सेदारी में से किसी राज्य का हिस्सा नहीं घटाया है।'वित्त मंत्री ने कहा कि 16वें वित्त आयोग ने 2018-19 से 2022-23 तक राज्यों की कर हिस्सेदारी का विश्लेषण किया और निष्कर्ष निकाला कि केंद्र से राज्यों को मिलने वाला यह धन आयोग की सिफारिश से पूरी तरह मेल खाता है और इसमें कोई कमी नहीं की गई है।

'अगले वित्त वर्ष में राज्यों को कर हस्तांतरण 25.44 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान'

उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष में राज्यों को कुल कर हस्तांतरण 25.44 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है जो चालू वित्त वर्ष की तुलना में 2.07 लाख करोड़ रुपये अधिक होगा। सीतारमण ने कहा कि संविधान ने केंद्र को उपकर और अधिशेष लगाने का अधिकार दिया है और विभाज्य पूल में वह शामिल नहीं होता है, इसलिए राज्यों की कुल कर हिस्सेदारी की बात करते समय उपकर और अधिशेष संबंधी आरोप अनुचित हैं।

'अगले वित्त वर्ष के लिए कुल 53.47 लाख करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान'

उन्होंने कहा कि केंद्र जो उपकर वसूलता है उसमें से भी राज्यों को अस्पताल, स्कूल और सड़क आदि के निर्माण के लिए सहायता देता है।

सीतारमण ने कहा कि सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए कुल 53.47 लाख करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान लगाया है, जो 31 मार्च को समाप्त हुए मौजूदा वित्तीय वर्ष की तुलना में 7.7 प्रतिशत अधिक है।

'चालू वित्त वर्ष का बजट 49.64 लाख करोड़ रुपये है'

संशोधित अनुमान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष का बजट 49.64 लाख करोड़ रुपये है, जो फरवरी, 2025 में अनुमानित 50.65 लाख करोड़ रुपये से कम है। वित्त वर्ष 2024-25 का बजट 46.52 लाख करोड़ रुपये का था।वित्त मंत्री ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में कुल व्यय 53.47 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो कर राजस्व से कहीं अधिक है।सरकार का लक्ष्य 44.04 लाख करोड़ रुपये का कर राजस्व प्राप्त करना है, जो पिछले वर्ष की तुलना में आठ प्रतिशत अधिक है।

उन्होंने पूंजीगत व्यय का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने 12.2 लाख करोड़ रुपये का अब तक का सबसे अधिक आवंटन किया है, जो जीडीपी का 4.4 प्रतिशत है।सीतारमण ने कहा कि इसके अलावा, सरकार राजकोषीय अनुशासन का पालन कर रही है और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत यानी 16.95 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

'सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान'

राजकोषीय घाटे के वित्तपोषण के लिए, दिनांकित प्रतिभूतियों के जरिये शुद्ध बाजार उधारी 11.7 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। शेष वित्त पोषण लघु बचत और अन्य स्रोतों से आने की उम्मीद है। सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।उन्होंने कहा कि ऋण-जीडीपी अनुपात को कम करने पर ध्यान केंद्रित करना राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) का हिस्सा है।

'2026-27 के बजट में ऋण-जीडीपी अनुपात जीडीपी का 55.6 % रहने का अनुमान'

राजकोषीय प्रबंधन के स्वीकृत मानकों की ओर बढ़ने के लिए, 2025-26 के बजट में उन्होंने संकेत दिया था कि केंद्र सरकार 2030-31 तक ऋण-जीडीपी अनुपात को एक प्रतिशत घट-बढ़ के साथ 50 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखेगी।इसी के अनुरूप, 2026-27 के बजट में ऋण-जीडीपी अनुपात जीडीपी का 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2025-26 के बजट में यह जीडीपी का 56.1 प्रतिशत था।

ऋण-जीडीपी अनुपात में कमी से ब्याज भुगतान पर होने वाला खर्च कम होगा और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के व्यय के लिए संसाधन उपलब्ध होंगे।उन्होंने देश में उर्वरकों की कमी के दावों का खंडन करते हुए कहा कि किसानों के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध है और सरकार ने किसानों की सहायता के लिए इसके आयात को 1.71 लाख करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन किया है।सीतारमण ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी के इस दावे का भी खंडन किया कि भारत ने अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करते समय अमेरिकी दबाव के आगे घुटने टेक दिए।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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